पीड़ितों को न्याय नहीं, उल्टे पुलिसिया दमन : भाकपा माले 

पीड़ितों को न्याय नहीं, उल्टे पुलिसिया दमन : भाकपा माले

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पटना, 29 अगस्त 2025

 

भाकपा(माले) राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि राजधानी के बीचोंबीच हुई चितकोहरा की यह शर्मनाक वारदात पूरे समाज को झकझोर देने वाली है। घटना के अनुसार, विद्यालय के बाथरूम में छात्रा पर केरोसिन छिड़ककर आग लगाई गई और दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया गया। जब तक स्थानीय लोगों ने दरवाज़ा तोड़ा, तब तक वह बुरी तरह झुलस चुकी थी और PMCH ले जाते हुए उसने दम तोड़ दिया। यह सिर्फ़ एक हत्या नहीं, बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था और समाज की आत्मा पर सीधा हमला है।

 

इसी तरह इंद्रपुरी में दो मासूम बच्चों की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके में गुस्सा और शोक की लहर पैदा कर दी। मगर इनकी न्यायपूर्ण माँगों को सुनने की बजाय सरकार ने 48 निर्दोष नागरिकों पर मुकदमे थोप दिए और गिरफ्तारियां कीं। सवाल यह है कि क्या न्याय की आवाज़ उठाना इस सरकार में अपराध है?

 

कुणाल ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा–जदयू सरकार अपराधियों को संरक्षण देती है और जनता की आवाज़ को दबाने के लिए पुलिसिया दमन का सहारा लेती है। बेटियों और बच्चों की सुरक्षा पर असंवेदनशील रवैया सरकार की नाकामी ही नहीं, बल्कि उसका आपराधिक चेहरा उजागर करता है।

 

भाकपा(माले) ने निम्न माँगें रखी हैं :

 

1. चितकोहरा कांड के आरोपी शिक्षक अनिल कुमार और स्कूल प्रधानाचार्य को तत्काल गिरफ्तार कर कठोर सज़ा दी जाए।

 

2. इंद्रपुरी में बच्चों की संदिग्ध मौत की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा बेगुनाह नागरिकों पर लगाए गए मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं।

 

3. छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजधानी से लेकर गाँवों तक ठोस कदम उठाए जाएं।

 

4. पुलिस दमन और प्रशासनिक तानाशाही पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

 

माले राज्य सचिव कुणाल ने आज भाजपा के गुंडों द्वारा कांग्रेस मुख्यालय पर की गई तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाओं की भी कड़ी निंदा की और कहा कि भाजपा के लोग लगातार कानून की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को सड़क पर उतरकर इस सरकार को उखाड़ फेंकना होगा।

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