रतनपुर के तालाबों पर अवैध कब्जे की समस्या चिंता जनक स्थानीय प्रशासन मौन सवालों को घेरे में तहसीलदार
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बिलासपुर, रतनपुर
दक्षिण कौशल की राजधानी कहे जाने वाले रतनपुर में कलचुरी राजवंश के राजाओं ने अपने शासनकाल में लगभग 300 तालाब बनवाए थे। लेकिन आजादी के बाद से इन तालाबों पर अवैध कब्जे होने लगे हैं। हाल ही में नगर पालिका और राज्य सरकार के प्रयासों से दो तालाबों के लिए 17 करोड़ रुपये का बजट भेजा गया है, लेकिन तालाबों पर नए कब्जे चिंताजनक हैं।
वार्ड क्रमांक 3 की पार्षद शोभा दुबे ने महामाया पारा दुलहरी तालाब को कब्जा मुक्त करने के लिए प्रयास किया था, लेकिन वहां एक बड़ा मुर्गी फार्म अवैध रूप से बनाया गया है। सूत्रों के अनुसार, अवैध कब्जे की मुख्य सूत्रधार तहसीलदार शिल्पा भगत हैं, जो भ्रष्टाचार के मामले में चर्चा में रही हैं।
आपको बताते चलें की फरवरी 2025 में नगरी निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद नगर पालिका अध्यक्ष लव कुश कश्यप ने जब शपथ ली थी सभी 15 पार्षदों के साथ तो सब ने एक ही संकल्प लिया था कि रतनपुर को अवैध कब्जे से मुक्ति मिलेगी और उस संकल्प को कहीं ना कहीं आज नगर पालिका परिषद के द्वारा जमीन पर उतरने की कोशिश की जा रही है लेकिन इसमें स्थानीय प्रशासन का सहयोग न मिलने की वजह से यह संकल्प पूरा होने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है
तहसीलदार शिल्पा भगत पर पहले भी अवैध संपत्ति के आरोप लगे हैं। उनका ट्रांसफर सकरी तहसील बिलासपुर के लिए किया गया था, लेकिन कुछ महीनों बाद ही वे वापस रतनपुर आ गईं। उनकी संवेदनहीनता और ईमानदारी पर सवाल उठ रहे हैं।
यह सच है या झूठ, यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन जब किसी प्रशासनिक अधिकारी या कर्मचारी पर इस तरीके से आरोप लगाते हैं तो जांच एजेंसियों को इसकी जांच करना आवश्यक हो जाता है।
अभी लगभग डेढ़ 2 साल पहले ही रतनपुर के समिति बाजार में अवैध रूप से सरकारी संपत्ति को निजी संपत्ति घोषित करके लाखों रुपए लेने का आरोप भी लगा था। इस बीच तहसीलदार शिल्पा भगत का कुछ समय के लिए सकरी तहसील बिलासपुर के लिए ट्रांसफर कर दिया गया कुछ महीनो बाद ही वापस से रतनपुर वापस तहसीलदार आ गई।
विषय यहा नहीं है कि कौन तहसीलदार कहां रहेगा या कहां उसका ट्रांसफर होगा, विषय है कि जिस प्रकार से तहसीलदार की किसी भी मामले में संवेदन हीनता नजर आती है उससे कहीं ना कहीं ऐसा लगता है कि तहसीलदार अपनी जिम्मेदारी या पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ नहीं निभा रही हैं।
