शुक्रगुलज़ार कार्यक्रम में संगीत और नृत्य की अविस्मरणीय शाम
बिहार सरकार के अंतर्गत भारतीय नृत्य कला मंदिर द्वारा दिनांक 30 जनवरी 2026 की सांस्कृतिक संध्या “शुक्रगुलज़ार” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। भारतीय नृत्य कला मंदिर, पटना द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या “शुक्रगुलज़ार” में संगीत और नृत्य की अविस्मरणीय प्रस्तुतियाँ हुईं। कार्यक्रम में स्वरसाधना ग्रुप ने विद्यापति रचित नाचारी रचना “कखन हरम दुखवा हमार हे भोलेनाथ” से शुरुआत की, जिसने दर्शकों को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री आलोक राज का स्वागत भारतीय नृत्य कला मंदिर की प्रशासी पदाधिकारी सुश्री कहकशां द्वारा पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया गया। इसके पश्चात ‘स्वरसाधना ग्रुप’ का भी पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति ‘स्वरसाधना ग्रुप’ द्वारा विद्यापति रचित नाचारी रचना “कखन हरम दुखवा हमार हे भोलेनाथ” से हुई, जिसने दर्शकों को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। इसके बाद झूमरों की श्रृंखला में “झूमर ला दो हे बलम”, स्त्री की विरह वेदना पर आधारित पूर्वी झूमर तथा “चौपट बलमुआ” जैसी एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह का वातावरण बना दिया। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति में वसंत ऋतु के उल्लास को दर्शाती “धमार” की प्रस्तुति देकर कलाकारों ने वसंत का मान बढ़ाया और कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
द्वितीय सत्र में मंच संभालते हुए बिहार के पूर्व डीजीपी श्री आलोक राज ने अपने जीवन यात्रा के अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार उन्होंने पुलिस सेवा प्रणाली से शास्त्रीय संगीत की ओर अपना रुझान विकसित किया। उनकी पहली प्रस्तुति भगवान श्रीकृष्ण के विरह और प्रेम से सराबोर भजन “बाट निहारे घनश्याम” से हुई। इसके पश्चात “आज वहीँ गीतों की रानी” तथा दुष्यंत कुमार की प्रसिद्ध ग़ज़ल “मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ” गजल सम्राट जगजीत सिंह का प्रसिद्ध गजल”प्यार का पहला खत लिखने में” सहित अन्य रचनाओं ने श्रोताओं का मन मोह लिया।
गौरतलब है कि कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक थे, जिनका प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ संगीत साधना में भी विशेष योगदान रहा है।
