श्रीमद् भागवत कथा का पंचम दिवस

श्रीमद् भागवत कथा का पंचम दिवस – कथा एवं झांकी से भावविभोर हुए श्रद्धालु

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झरिया धनबाद। जिंदल परिवार द्वारा भव्य रूप से आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह कथा का पंचम दिवस बड़े ही उत्साह, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। कथा वाचन का पुण्य अवसर परम पूज्य आचार्य श्री कन्हैया द्विवेदी जी महाराज के पावन मुखारविंद से हुआ, जिनकी वाणी से कथा श्रवण करते ही श्रद्धालु भक्तजन भावविह्वल होकर अध्यात्म-रस में सराबोर हो उठे।

आज के पंचम दिवस की कथा में आचार्य श्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत सुंदर और मार्मिक वर्णन किया। कथा में उन्होंने भक्तों को यह संदेश दिया कि जब तक जीवन में भक्ति और प्रेम का संचार नहीं होगा, तब तक आनंद की प्राप्ति संभव नहीं है। उनकी कथा सुनते ही श्रोता मंडली बार-बार “राधे-कृष्ण” के नाम का गुणगान करने लगी।

झांकी की विशेष छटा

कथा के मध्य कतरास से पधारे प्रसिद्ध झांकी कलाकार श्री नवीन कुमार गुप्ता ने अपने कौशल और भक्ति भाव से भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला की जीवंत झांकी प्रस्तुत की। यह दृश्य इतना मनोरम और अद्भुत था कि श्रद्धालु अपने आप को द्वापर युग की गलियों में अनुभव करने लगे।

बाल रूपी कृष्ण का माखन चुराकर ग्वाल-बालों के संग बांटना, उनकी चंचल मुस्कान और गोपियों की शिकायतों का चित्रण झांकी में इतने सजीव रूप से किया गया कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई झूम उठा।

झांकी की सजावट, परिधान और मंचन इतना मोहक था कि श्रद्धालु लगातार तस्वीरें लेते रहे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा पंडाल गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कहा कि श्री नवीन कुमार गुप्ता का यह प्रयास वास्तव में वृंदावन के वातावरण का सजीव रूप सामने लाता है।

श्रद्धालुओं का उत्साह

पूरे कार्यक्रम में भक्तगणों की अपार भीड़ उमड़ी रही। कथा और झांकी का संगम भक्तिरस का अद्भुत अनुभव लेकर आया। सभी ने एक स्वर से कहा कि पंचम दिवस की यह प्रस्तुति अविस्मरणीय रही, जिसने न केवल धर्म का संदेश दिया बल्कि भक्ति, प्रेम और आनंद का रसपान भी कराया।

इस प्रकार जिंदल परिवार द्वारा आयोजित कथा सप्ताह का पंचम दिवस धर्म, अध्यात्म और भक्ति का अनुपम संगम बनकर श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया।

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