सेहल गांव: मिलकर किए गए प्रयासों से बदली तस्वीर, बना जलवायु-स्मार्ट विकास का उदाहरण

गुमला :घाघरा प्रखंड स्थित, सेहल पंचायत का सेहल गांव आज यह दिखा रहा है कि जब सरकारी विभाग, सामाजिक संस्था और किसान एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो विकास लोगों की ज़िंदगी में साफ दिखाई देता है। सरकारी विभागों, प्रदान(PRADAN) और घाघरा महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड (GWFPCL) के आपसी सहयोग से सेहल गांव आज आजीविका, खेती और जलवायु के अनुकूल विकास का एक अच्छा उदाहरण बन रहा है।

मनरेगा (MGNREGA) योजना के तहत गांव में 5 एकड़ में आम का बाग लगाया गया है। वहीं प्रदान के सहयोग से 22 एकड़ में भी आम की बागवानी की गई है। गांव में पानी की सुविधा बढ़ाने के लिए मनरेगा से दो तालाब बनाए गए हैं। इसके साथ ही

सोलर लिफ्ट सिंचाई योजना के माध्यम से 65 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिली है, जिससे 52 किसान सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

सेहल गांव को क्लाइमेट-स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित किया गया है। यहां 65 एकड़ खेती में सौर ऊर्जा से सिंचाई की जा रही है और 110 घरों में बिजली पहुंचाई गई है। इन प्रयासों से ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ रही है और कई परिवारों की सालाना आय ₹1 से ₹1.5 लाख तक पहुंचने की संभावना है। गांव में सौर ऊर्जा आधारित तेल निकालने की मशीन और पत्तल बनाने की मशीनें भी लगाई गई हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर बने हैं।

खेती के क्षेत्र में भी विभागों का अच्छा तालमेल देखने को मिला है। कृषि विभाग के सहयोग से 12 एकड़ में सरसों की खेती की गई है। उद्यान विभाग के माध्यम से 5 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की गई है। GWFPCL द्वारा किसानों को उन्नत खेती और अधिक आमदनी वाली फसलों के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वर्तमान में गांव में 14 एकड़ में हरी मटर और 16 एकड़ में सरसों की खेती हो रही है, जिससे 42 किसान लाभान्वित हैं और प्रति किसान ₹40,000 से ₹50,000 तक की मौसमी आय होने की उम्मीद है।

सरकारी योजनाओं, प्रदान और GWFPCL के मिलेजुले प्रयासों से सेहल गांव आज एक ऐसा गांव बन रहा है, जहां खेती मजबूत हो रही है, आमदनी बढ़ रही है और लोग भविष्य को लेकर आश्वस्त महसूस कर रहे हैं। सेहल गांव अब सतत और आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास की ओर बढ़ता हुआ एक प्रेरणादायी उदाहरण बन चुका है।

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