रामराज्य बैठे त्रिलोक हर्षित भय गए सब सोका
===========°=========
रायपुर
आज का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ गया है, जब देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। यह क्षण 140 करोड़ भारतीयों के लिए एक सपना साकार होने जैसा है, जब रामराज की स्थापना हुई और राम मंदिर के शिखर पर भगवा लहरा रहा है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उपस्थित थे। मोहन भागवत ने अपने भाषण में कहा कि अशोक सिंगल जी की आत्मा आज बहुत शांति महसूस कर रही होगी, क्योंकि उनका सपना पूरा हो गया है
राम मंदिर का निर्माण एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक है, जो भारतीय संस्कृति और परंपरा को विश्वभर में प्रदर्शित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि यह क्षण केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि मानसिक गुलामी से मुक्ति का संदेश भी देता है।
आज का दिन इसलिए विशेष है क्योंकि यह भगवान राम और माता सीता के विवाह का दिन है, जिसे विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह क्षण भारतीय इतिहास में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है, जहां भारत विश्व गुरु बनने के लिए तैयार है।
सदियों तक किसी ने सच को दबाने की कोशिश की, कभी जुल्म बदला, कभी चेहरे बदले, लेकिन हमारे राम के लिए धड़कने वाला विश्वास कभी नहीं टूटा। इतिहास की हर चोट ने हमें कमजोर नहीं किया, बल्कि और मजबूत बनाया। हर पीढ़ी ने इस संघर्ष को अपने खून की गर्मी से आगे बढ़ाया, ताकि आने वाला समय जान सके कि राम सिर्फ़ धर्म का नाम नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता, हमारी पहचान और हमारे स्वाभिमान की जड़ है।
आज जब यह ध्वज हवा में लहराता है, तो ये सिर्फ़ किसी कपड़े का टुकड़ा नहीं होता। इसमें 500 वर्षों की वेदना, त्याग, संघर्ष और तपस्या की गाथा छिपी है। इसे ध्वज कहना आसान है, पर इसे महसूस करना हर दिल का काम है जो राम की भक्ति में धड़कता है। यह उस देश की पहचान है जहाँ राम का नाम जीवित है और हमेशा रहेगा।
आज की पीढ़ी उठे हुए माथे के साथ कहती है—हमने अपना इतिहास पा लिया है। जय श्री राम!
रिपोर्ट: अनूप चौरसिया
