गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक

गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक

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पटना, 22 दिसंबर 2025

 

राज्य में गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से आज बामेति सभागार में एक दिवसीय समीक्षात्मक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता डॉ. एन. विजयलक्ष्मी, अपर मुख्य सचिव, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार ने की। इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री मनीष कुमार एवं निदेशक, पशुपालन श्री उज्ज्वल कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। बैठक में गौशाला अध्यक्ष-सह-अनुमंडल पदाधिकारी, राज्य की सभी गौशालाओं के सचिव, सभी क्षेत्रीय निदेशक (पशुपालन) तथा बिहार के सभी जिला पशुपालन पदाधिकारी उपस्थित रहे।

 

बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में गौशालाओं के सुदृढ प्रबंधन, दीर्घकालिक विकास और अत्मनिर्भर बनाने पर विस्तृत चर्चा थी । बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि गौशालाएं केवल आश्रय स्थल न होकर उत्पादकता और स्थायित्व का केंद्र बननी चाहिए। इसके लिए मजबूत आधारभूत संरचना का विकास आवश्यक है. जिसमे स्वच्छ जल आपूर्ति, पर्याप्त चारा, सुरक्षित आश्रय और आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाएं शामिल हों।

 

बैठक में बिहार गोशाला विनियमन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विचार किया गया। इसमें प्रबंधन समितियों का गठन, पारदर्शी अभिलेख रख-रखाव और स्वास्थ्य मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं, अनुदान, सब्सिडी और नवाचार आधारित आय सृजन मॉडल जैसे जैविक खाद, बायोगैस एवं गौ-आधारित रोजगारपरक उत्पादों को बढ़ावा देने पर विस्तार पूर्वक चर्चा हुई।

 

डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि “गौशालाओं के प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी समाधान अपनाना समय की आवश्यकता है। इससे न केवल पशुओं का कल्याण होगा बल्कि लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम होगा। “शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्तों एवं अन्य त्यक्त पशुओं की बढ़ती संख्या जनसुरक्षा के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर समस्या बन चुकी है। तेज गति से चलने वाले वाहनों के कारण इन पशुओं से होने वाली सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में NHAI, सड़क एवं परिवहन विभाग की समन्वित और प्रभावी भूमिका अत्यंत आवश्यक है। सड़कों पर विचरण कर रहे पशुओं को हटाकर उन्हें सुरक्षित आश्रय गृहों तक पहुंचाया जाना आवश्यक है। जो गोशालाएं वर्तमान में नॉन-फंक्शनल हैं, उन्हें शीघ्र कार्यशील बनाया जाए तथा जो गोशालाएं संचालित हैं, उनके बुनियादी ढांचे और प्रबंधन को और सुदृढ़ किया जाए। गोशालाओं का संचालन उसी मूल उद्देश्य के अनुरूप हो, जिसके लिए उनका निर्माण किया गया था। साथ ही, टीकाकरण की शुरुआत भी व्यवस्थित रूप से गोशालाओं से की जाए।”

 

निदेशक, पशुपालन, श्री उज्ज्वल कुमार सिहं ने गौशालाओं में पशु स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और क्षमता निर्माण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली” लागू करने से पारदर्शिता बढ़ेगी और पशुओं की देखभाल बेहतर ढंग से हो सकेगी।

 

अंत में राज्य के सभी जिलों में आदर्श गौशालाओं की स्थापना की बात कही गई। इस उद्देश्य से एक विस्तृत, समयबद्ध एवं व्यावहारिक कार्य योजना तैयार की जाएगी, जिसके माध्यम से गौशालाओं को न केवल पशु संरक्षण और पशुधन संवर्धन का केंद्र बनाया जाएगा, बल्कि उन्हें ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जाएगा।

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