भविष्य के प्रशासनिक अधिकारियों ने जाना ‘ग्रामीण विकास’ का मंत्र, घाघरा के मॉडल को बारीकी से समझा
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घाघरा | गुमला प्रशासनिक सेवा की बारीकियों को किताबी पन्नों से निकलकर जमीन पर समझने के लिए डिप्टी कलेक्टर के 11वीं बैच के अधिकारी घाघरा प्रखंड पहुंचे। यह दौरा महज एक औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकास के पहियों को नजदीक से देखने का एक ‘लर्निंग एक्सपीरियंस’ रहा।
खेत-खलिहान से कुटीर उद्योग तक का सफर
अधिकारियों के दल ने सेहल पंचायत को अपनी पाठशाला बनाया। यहाँ उन्होंने देखा कि कैसे मनरेगा सिर्फ गड्ढे खोदने तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘बागवानी’ के जरिए किसानों की तकदीर बदल रही है।
अधिकारियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा ‘ग्रीन एनर्जी’ आधारित कुटीर उद्योग। प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों ने यह जाना कि कैसे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं।
विकास के ‘त्रि-आयामी’ मॉडल पर चर्चा
निरीक्षण के दौरान तीन मुख्य स्तंभों पर विशेष ध्यान दिया गया:
महिला सशक्तिकरण: महिला FPO के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन।
बुनियादी ढांचा: सिंचाई कूप और प्रधानमंत्री आवास योजना की पारदर्शिता।
सस्टेनेबिलिटी: बागवानी मिशन और हरित ऊर्जा का समन्वय।
अनुभवी हाथों से मिला मार्गदर्शन
DDC श्री दिलेश्वर महतो ने एक गुरु की भूमिका निभाते हुए युवा अधिकारियों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फाइलों के पीछे की असली सच्चाई गांवों की पगडंडियों पर मिलती है। मौके पर प्रखंड प्रशासन की ओर से अंचलाधिकारी सुशील कुमार खाखा और बीडीओ दिनेश कुमार ने भी अपने अनुभव साझा किए।
“विकास तब सार्थक है जब वह अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाए।” — निरीक्षण के दौरान साझा किया गया संदेश
