सड़क सुरक्षा महा अभियान गुमला

गुमला में सड़क सुरक्षा का महा-अभियान: जुर्माना भी, पर साथ ही मानवता भी

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गुमला: गुमला की सड़कों पर आज एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि प्रशासन का डंडा सिर्फ सख्त नहीं, बल्कि संवेदनशील भी होता है।

उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए गए इस अभूतपूर्व अभियान ने न केवल लापरवाह चालकों को सबक सिखाया, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण भी जगाई।

इस महा-अभियान में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया, वहीं जरूरतमंदों को मुफ्त में हेलमेट देकर मानवता की मिसाल पेश की गई।

जिला परिवहन पदाधिकारी ज्ञान शंकर जायसवाल जी के नेतृत्व में सड़कों पर उतरी पूरी टीम………….

यह कोई सामान्य जांच अभियान नहीं था। आज खुद अपर समाहर्ता शशिंद्र कुमार बड़ाइक, जिला परिवहन पदाधिकारी ज्ञान शंकर जायसवाल, पुलिस उपाधीक्षक बीरेंद्र टोप्पो, एसडीपीओ सुरेश प्रसाद यादव, सार्जेंट मेजर अभिमन्यु कुमार, गुमला थाना प्रभारी *महेंद्र करमाली, और मोटरयान निरीक्षक प्रदीप कुमार तिर्की समेत अधिकारियों की एक पूरी फौज सड़कों पर उतरी। उनका लक्ष्य साफ था – सड़क सुरक्षा को एक जन-आंदोलन बनाना। इस दौरान, कार्यालय से निकलने वाले कर्मचारियों में भी हड़कंप मच गया और कई लोग भागने की कोशिश करते हुए पकड़े गए। न पुलिस का बहाना चला, न विभाग का।

चालान का ‘शतक’ और लाखों की वसूली

अभियान के दौरान प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई।

135 से अधिक लापरवाह चालकों को रोककर उन पर कड़ा जुर्माना लगाया गया।

मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाने से लेकर बिना हेलमेट या कागजात के गाड़ी चलाने तक, हर गलती पर चालान काटा गया। इसके अलावा, शराब पीकर गाड़ी चला रहे लोगों, तीन लोगों को बिठाकर चलने वाले बाइक चालकों, बिना सीट बेल्ट लगाए गाड़ी चला रहे लोगों, और तेज गति से चल रहे लोगों पर भी भारी जुर्माना लगाया गया।

काले शीशे वाली गाड़ियों पर भी कार्रवाई हुई और उनकी ब्लैक फिल्म को मौके पर ही उतरवा दिया गया।

यहाँ तक कि ऑटो और रिक्शा में क्षमता से ज्यादा सवारी बिठाने वालों को भी नहीं बख्शा गया। देखते ही देखते 1 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया, जिसने प्रशासन की सख्ती को दर्शा दिया।

हेलमेट बोझ नहीं, परिवार की ढाल है

सबसे भावुक और यादगार क्षण वह था, जब अधिकारियों ने मानवता का परिचय दिया।

दिहाड़ी मजदूर,छोटे-मोटे विक्रेता और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को जब बिना हेलमेट के पकड़ा गया, तो उन पर जुर्माना लगाने की बजाय, उन्हें मुफ्त में हेलमेट दिया गया।

इस मौके पर अधिकारियों ने कहा, “यह सिर्फ हेलमेट नहीं, यह आपके परिवार के लिए सुरक्षा कवच है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पैसे की कमी के कारण अपनी जान जोखिम में न डालें। यह कदम उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत साबित हुआ जो रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करते हैं।

एक संदेश जो दूर तक जाएगा

इस अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रशासन का मकसद केवल दंड देना नहीं, बल्कि नागरिकों को जागरूक करना है। यह सिर्फ एक दिन का अभियान नहीं था, बल्कि एक मजबूत संदेश था कि गुमला की सड़कें अब सुरक्षित होंगी। यह पहल निश्चित रूप से देश के अन्य जिलों के लिए एक प्रेरणा बन सकती है।

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