धनबाद :- कतरास में डॉ. मृणाल की पुस्तक ‘प्रेमचंद : हमारे हमसफर’ का लोकार्पण=
==================
साहित्यकारों और आलोचकों ने कहा – “प्रेमचंद आज भी हमारे समय के प्रासंगिक मार्गदर्शक”
कतरास—स्थानीय भारतीय क्लब के सभागार में आज वरिष्ठ कवि अनवर शमीम की अध्यक्षता में साहित्यिक गरिमा से परिपूर्ण एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस अवसर पर डॉ. मृणाल की पुस्तक ‘प्रेमचंद : हमारे हमसफर’ का लोकार्पण सह परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें साहित्य जगत से जुड़े विद्वानों, आलोचकों और कवियों ने भाग लिया।
प्रेमचंद की प्रासंगिकता पर गहन विमर्श
मुख्य वक्ता के रूप में लखनऊ से आए जलेस के राष्ट्रीय सचिव प्रो. नलिन रंजन सिंह ने कहा कि प्रेमचंद पर लगाए गए तमाम आरोप फासिस्ट ताक़तों की उपज हैं और निराधार हैं। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को नए ढंग से परिभाषित किया और समाज में नई चेतना जगाई।
प्रो. हिमांशु शेखर चौधरी ने कहा कि “हम सभी प्रेमचंद के गढ़े गए लोग हैं।” उन्होंने सामूहिकता के क्षरण पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि प्रेमचंद ने राष्ट्रवाद को अपने अनूठे ढंग से प्रस्तुत किया।
डा. बलभद्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी-उर्दू साहित्य के साथ-साथ हिंदू-मुस्लिम एकता और धर्मनिरपेक्षता को अपनी रचनाओं में सदैव प्राथमिकता दी। डॉ. मृणाल की इस पुस्तक के चार अध्यायों में इन पहलुओं का गंभीर विश्लेषण किया गया है।
आलोचक डॉ. अली इमाम खान ने कहा कि यह पुस्तक प्रेमचंद को नए संदर्भ में समझने और उन्हें समग्रता में देखने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
कार्यक्रम में शामिल साहित्यकार और अतिथि इस अवसर पर विजय झा, उपन्यासकार मनमोहन पाठक, प्रो. राजेन्द्र मिश्र सहित कई विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन जलेस के जिला सचिव कुमार अशोक ने किया।
सभागार में उपस्थित प्रमुख साहित्य प्रेमियों और गणमान्य व्यक्तियों में राजेन्द्र राजा, मुन्ना सिद्दीकी, मातादीन अग्रवाल, उमाशंकर तिवारी, स्वामीनाथ पाण्डेय, विद्यानंद झा, विनय सिंह, शंकर चौहान, रंजन मिश्रा, विष्णु कुमार, राजेंद्र प्रजापति, उमेश ऋषि, जयदेव बनर्जी, प्रभात मिश्रा, आज़ाद प्रसाद सिंह, राहुल और राजेश रवि शामिल थे।
