नीति आयोग की पहल से बिहार के पैक्सों को मिलेगी नई दिशा, दो दिवसीय कार्यशाला शुरू

नीति आयोग की पहल से बिहार के पैक्सों को मिलेगी नई दिशा, दो दिवसीय कार्यशाला शुरू

 

पटना , 19मार्च 26

नीति आयोग द्वारा ‘नीति राज्य कार्यशाला श्रृंखला’ के अंतर्गत दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ है।इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को सुदृढ़ बनाकर किसानों की आय में वृद्धि एवं कृषि आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन देना है।

कार्यशाला में 10 राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, उड़ीसा, पंजाब, सिक्किम एवं त्रिपुरा राज्यों से आए प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं

“नीति आयोग द्वारा ‘नीति राज्य कार्यशाला श्रृंखला’ के अंतर्गत दो दिवसीय कार्यशाला शुभारंभ माननीय मंत्री, सहकारिता विभाग डॉक्टर प्रमोद कुमार द्वारा किया गया।

 

इस अवसर पर माननीय मंत्री सहकारिता विभाग ने कहा कि नीति आयोग द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय कार्यशाला बिहार में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देने की एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय पहल है। अब राज्य के किसानों को धान एवं गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहकर विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने मखाना एवं लीची जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों में बिहार की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए इनके वैज्ञानिक उत्पादन एवं विपणन पर बल दिया। सहकारिता के माध्यम से सब्जी, दुग्ध, शहद एवं मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक विस्तार की संभावनाएं हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकता है। सहकारिता संस्थाओं को बहुउद्देशीय बनाकर गांवों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन सुनिश्चित किया जा सकता है। ‘श्री अन्न’ जैसे मरुआ, बाजरा आदि के उत्पादन को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ये फसलें न केवल पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि जलवायु अनुकूल कृषि के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं।

माननीय मंत्री ने राज्य के किसानों से अपील किया कि वे मिट्टी की जांच के आधार पर फराल चयन करें, ताकि उत्पादन लागत में कमी लाते हुए अधिकतम उपज एवं आय सुनिश्चित की जा सके।

 

सहकारिता विभाग के निबंधक श्री रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में 8463 पैक्स हैं, जिसमें 1.39 करोड सदस्य जुड़े हैं। यह संख्या हमारी आबादी का 10 प्रतिशत से ज्यादा है। इन्हें व्यवसायिक गतिविधियों से जोड़ा जाए तो आने वाले समय में बिहार की तस्वीर बदली जा सकती है। हम पैक्सों के जरिए प्रयासरत है कि गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार मिले।

 

नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने इस अवसर पर कहा कि किसान समूहों को सशक्त करने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है। जापान और डेनमार्क जैरो देश सहकारिता के माध्यम से आगे बढ़े हैं। हमें भी देश में सहकारिता मॉडल को विकसित करना होगा, जिससे कमजोर तबके का तेजी से विकास होगा।

 

इसके साथ ही नीति आयोग की प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. राका सक्सेना ने कहा कि बिहार में छोटे जोत वाले किसानों की संख्या काफी अधिक है। देश में एक हेक्टेयर से कम भूमि वाले सीमांत किसानों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है, जबकि बिहार में ऐसे किसानों की संख्या लगभग 87 प्रतिशत है। ऐसे में जरूरत है कि हम ऐसे मॉडल विकसित करें, जिससे यहां की कृषि और किसानों का विकास हो। पैक्सों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी मदद मिल सकती है।

 

दो दिवसीय इस कार्यशाला के दौरान PACs के आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण, व्यावसायिक विस्तार, वित्तीय समावेशन एवं किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ उनके समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। साथ ही, पूर्वी भारत के राज्यों में सफल मॉडलों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श होगा।

 

कार्यशाला के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य की नीतियों एवं कार्यक्रमों के लिए ठोस सुझाव तैयार किए जाएंगे, जो पूर्वी भारत में कृषि एवं सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेंगे।

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