आजादी के 78 साल बाद भी अंधेरे में ‘परसा पानी’: पुल नहीं, 4 महीने टापू बनता गांव, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

आजादी के 78 साल बाद भी अंधेरे में ‘परसा पानी’: पुल नहीं, 4 महीने टापू बनता गांव, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

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बिलासपुर/कोटा

कोटा ब्लॉक की ग्राम पंचायत परसा पानी में आजादी के 78 साल बाद भी विकास की रोशनी नहीं पहुंची है। 2500 की आबादी वाला यह गांव आज भी पक्की सड़क, बिजली, पुल, जर्जर स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

नाले पर पुल नहीं, 4 महीने दुनिया से कट जाता हैगांव

गांव की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि मुख्य मार्ग और गांव के बीच पड़ने वाले बरसाती नाले पर आज तक पुल नहीं बना। नतीजा, हर बरसात में 4 महीने तक परसा पानी का संपर्क दूसरे गांवों और कोटा मुख्यालय से पूरी तरह टूट जाता है।

ग्रामीणों का कहना है, “जून से सितंबर तक हम टापू बन जाते हैं। बच्चों की शिक्षा पूरी तरह बाधित हो जाती है। अगर कोई बीमार हो जाए या प्रसव पीड़ा हो तो मरीज को खाट पर लादकर उफनते नाले को पार करना पड़ता है। कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देता है।”

विधायक-ग्रामीणों में दौरों को लेकर ठनी

ग्रामीणों ने फोन पर बताया कि विधायक चुनाव जीतने के बाद सिर्फ दो बार गांव आए हैं – एक बार क्रिसमस के मौके पर और दूसरी बार अपने परिवार के साथ किसी स्कूली बच्चे से मिलने। वहीं जब विधायक से फोन पर बात की गई तो उन्होंने दावे को खारिज करते हुए कहा, “ग्रामीण झूठ बोल रहे हैं। मैं 10 बार से अधिक परसा पानी जा चुका हूं। विकास के काम लगातार कराए जा रहे हैं,पर ग्रामीणों का सवाल है कि “सवाल यह नहीं कि विधायक जी कितनी बार आए, सवाल यह है कि 78 साल बाद भी हमारा गांव बुनियादी सुविधाओं से महरूम क्यों है? पुल क्यों नहीं बना?”

ऐसे में जब राज्य सरकार ‘सुशासन तिहार’ मना रही है, परसा पानी के लोग पूछ रहे हैं – “क्या यही सुशासन है जहां चलने के लिए सड़क नहीं, नाला पार करने को पुल नहीं, बरसात में 4 महीने संपर्क टूट जाता है, बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है?”

ग्रामीण अब सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पीडब्ल्यूडी मंत्री अरुण साव से जवाब मांग रहे हैं कि बरसाती नाले पर पुल कब बनेगा? कोटा से परसा पानी तक पक्की सड़क कब पहुंचेगी?

क्षेत्र की बदहाली को देखकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष निलेश विश्वास ने कई बार संबंधित विभागों के अधिकारियों से बात की। अधिकारियों द्वारा समस्याओं पर ध्यान न देने के बाद निलेश विश्वास ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।

याचिका पर सुनवाई करते हुए *छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया* और कहा, “जब यह मामला हम संज्ञान में ले रहे हैं तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है।” कोर्ट ने राज्य शासन और जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है।

परसा पानी की महिलाओं ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द नाले पर पुल, पक्की सड़क और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो क्षेत्र की महिलाएं जन आंदोलन करेंगी।

महिलाओं का कहना है, “क्या हर समस्या के लिए हमें हाईकोर्ट जाना पड़ेगा? हमारे बच्चे खुले में शौच जाते हैं, स्कूल की छत टपकती है, शाम 6 बजे बाद गांव अंधेरे में डूब जाता है। प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना जंग लड़ने जैसा है।”

*परसा पानी की 6 बड़ी समस्याएं*

1. *पुल नहीं:* नाले पर पुल न होने से बरसात में 4 महीने आवागमन ठप। शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन सब बाधित।

2. *सड़क नहीं:* मुख्य मार्ग से गांव तक 4 किमी कच्चा रास्ता। एंबुलेंस नहीं पहुंचती।

3. *बिजली बदहाल:* खंभे लगे हैं पर 24 घंटे में 6 घंटे भी लाइट नहीं। ट्रांसफार्मर 8 महीने से जला पड़ा है।

4. *शिक्षा भगवान भरोसे:* प्राथमिक शाला जर्जर। शौचालय नहीं। 8वीं के बाद पढ़ने 12 किमी कोटा जाना पड़ता है, जो बरसात में असंभव।

5. *आंगनबाड़ी केंद्र नहीं:* कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण व पोषण आहार की व्यवस्था नहीं।

*अब सबकी नजर प्रशासन पर*

NCP प्रदेश अध्यक्ष निलेश विश्वास ने कहा, “78 साल में सरकारें आईं-गईं, पर परसा पानी की तस्वीर नहीं बदली। अधिकारी कुंभकर्णी नींद में हैं। हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद अब उम्मीद है कि 2500 लोगों को उनका हक मिलेगा।”

अब देखना होगा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और सरकार परसा पानी के लिए कब तक पुल, सड़क और मूलभूत सुविधाएं बहाल कर पाती है। फिलहाल परसा पानी के लोग टकटकी लगाए ‘सुशासन’ का इंतजार कर रहे हैं।

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