घाघरा में ‘नल-जल योजना’ फेल, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे गुनिया गांव के ग्रामीण

घाघरा में ‘नल-जल योजना’ फेल, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे गुनिया गांव के ग्रामीण

घाघरा (गुमला): सरकार का दावा है कि ‘हर घर नल-जल’ योजना से ग्रामीणों की प्यास बुझ रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। घाघरा प्रखंड के कुहीपाट पंचायत अंतर्गत गुनिया गांव में सरकारी दावों और वास्तविकता के बीच का फासला अब ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ रहा है।

गर्मी की आहट के साथ गहराया जल संकट

अभी गर्मी ने सिर्फ दस्तक ही दी है और करीब 200 की आबादी वाला यह गांव पानी की बूंद-बूंद के लिए जद्दोजहद कर रहा है। गांव की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है:

खराब जलमीनार: गांव में सौर ऊर्जा संचालित कुल 6 जलमीनारें हैं, जिनमें से 3 लंबे समय से खराब पड़ी हैं। शेष 3 की स्थिति भी दयनीय है और तकनीकी खराबी के कारण उनसे नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

बेकार पड़े हैंडपंप: जलमीनारों के विकल्प के रूप में मौजूद हैंडपंप (चापाकल) भी मरम्मत के अभाव में सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।

1 किलोमीटर का सफर और महिलाओं की पीड़ा

पानी के अभाव में ग्रामीणों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए एक किलोमीटर दूर स्थित जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गांव की महिलाओं ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया:

“पानी लाने में ही हमारा आधा दिन बीत जाता है। इससे न केवल थकान होती है, बल्कि घर के अन्य जरूरी कामकाज और बच्चों की देखभाल भी प्रभावित हो रही है। यह हमारी रोज की अग्निपरीक्षा बन गई है।”

प्रशासनिक अनदेखी से ग्रामीणों में उबाल

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के चक्कर काटे हैं। लिखित आवेदन देने और मौखिक रूप से गुहार लगाने के बावजूद अब तक धरातल पर कोई सुधार नहीं दिखा है। प्रशासन की इस बेरुखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

ग्रामीणों की चेतावनी:

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द ही खराब पड़े चापाकल दुरुस्त नहीं किए गए या पानी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

बड़ा सवाल: मई-जून में क्या होगा?

वर्तमान में घाघरा प्रखंड के अधिकांश गांवों की स्थिति कमोवेश ऐसी ही बनी हुई है। जब अप्रैल की शुरुआत में ही ग्रामीण एक-एक किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं, तो मई और जून की भीषण तपिश में हालात कितने भयावह होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी या आंदोलन का इंतजार कर रहा है?

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