स्मारक तोड़ने की कोशिश अलोकतांत्रिक और दमनकारी: भाकपा–माले

प्रशासनिक कार्रवाई की कड़ी निंदा, जांच व जवाबदेही की मांग

पटना 4 मई 2026

भाकपा–माले राज्य सचिव कुणाल ने जहानाबाद जिले के सुकुलचक गांव में माओवादी नेता देव कुमार सिंह उर्फ अरविंद कुमार के स्मारक को तोड़ने के लिए 3 मई 2026 को भारी पुलिस बल के साथ की गई कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. पार्टी ने कहा कि यह कदम न सिर्फ अलोकतांत्रिक है, बल्कि नागरिकों के वैचारिक अधिकारों, सामाजिक स्मृति और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है.

प्रशासन बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया और स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए बिना स्मारक तोड़ने पहुंचा. इस दौरान स्मारक के हिस्सों को आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त किया गया और मार्बल उखाड़ दिया गया. हालांकि, स्थानीय जनता के तीखे प्रतिवाद के कारण प्रशासन को पीछे हटना पड़ा. बाद में किसी उच्च स्तर से निर्देश मिलने पर कार्रवाई रोक दी गई, जो पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

भाकपा–माले ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों की विविधता को स्वीकार करना मूल आधार होता है. किसी व्यक्ति का किसी विचारधारा से जुड़ा होना अपराध नहीं हो सकता. असहमति का समाधान संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होना चाहिए, न कि दमन और बल प्रयोग से. स्मारक को तोड़ने की कोशिश इस बात का संकेत है कि प्रशासन वैचारिक असहमति को भी जबरन दबाने की दिशा में बढ़ रहा है, जो बेहद चिंताजनक है.

पार्टी ने यह भी कहा कि अरविंद कुमार के निधन के बाद उनके परिजनों द्वारा अपने निजी जमीन पर स्वैच्छिक सहयोग से यह स्मारक बनाया गया था, जहां हर वर्ष उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है. इस तरह के स्मारक न केवल एक व्यक्ति की स्मृति से जुड़े होते हैं, बल्कि उस क्षेत्र के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास का भी हिस्सा होते हैं. ऐसे स्मारकों पर हमला दरअसल इतिहास और जनभावनाओं की अवहेलना है.

भाकपा–माले की जांच टीम, जिसमें राज्य स्थाई समिति के सदस्य कामरेड महानंद और रामाधार सिंह, राज्य कमिटी सदस्य रविंद्र यादव तथा स्थानीय नेता निरंजन कुमार और ललन सिंह शामिल थे, 4 मई को घटनास्थल पर पहुंची और परिजनों व स्थानीय लोगों से विस्तृत जानकारी ली. टीम ने पाया कि प्रशासन की कार्रवाई मनमानी और गैर-जरूरी थी.

भाकपा–माले राज्य कमिटी ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा स्मारक को हुए नुकसान की भरपाई की जाए। साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं.

पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की दमनकारी कार्रवाइयों पर रोक नहीं लगी, तो जनता के बीच व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा.

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