

====================================
पटना। 12जुलाई2025
बिहार कृषि प्रबंधन एवं प्रसार प्रशिक्षण संस्थान बमेती पटना में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार के मत्स्य प्रभाग द्वारा राष्ट्रीय मत्स्य पालक कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय श्रीमती रेणु देवी द्वारा किया गया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव एन. विजया लक्ष्मी स्वागत भाषण श्री अभिषेक रजनीश एवं उपाध्यक्ष बिहार राज्य मछुआरा आयोग के द्वारा दिया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मत्स्य कृषक, विभागीय अधिकारी, वैज्ञानिक, नीति निर्माता और अन्य हितधारक उपस्थित थे।
गौरतलब है कि प्रतिवर्ष 10 जुलाई को पूरे भारत में राष्ट्रीय मत्स्य पालक दिवस मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1957 में जीरालाल बौधरी और उनके सहयोगी बॉ. अलीकुन्त्री द्वारा मेजर कार्य प्रजातियों में प्रेरित प्रजनन की ऐतिहासिक सफलता की स्मृति में मनाया जाता है। इस तकनीक को ‘हाइपोकिशन’ कहा जाता है. जो भारतीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक बनी। इसी उपलब्धि की याद में प्रतिवर्ष यह दिवस मत्स्यपालकों और मछुआरों के योगदान को सम्मानित करने, जल संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने तथा जागरूकता फैलाने हेतु मनाया जाता है। बिहार में इसे विशेष मछुआरा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
बिहार राज्य जल संसाधनों से समृद्ध है। यहां 1.25 लाख हेक्टेयर तालाब, 13.804 हेक्टेयर ऑक्स-बो लेक, 9.41 लाख हेक्टेयर भूमि 56,565 हेक्टेयर जलाशय, 18,154 किलोमीटर लंबी नहरें तथा 3200 किलोमीटर लंबी नदियों उपलब्ध है, जो मात्त्रियकी विकास की असीम संभावनाएँ प्रदान करती है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य में कुल 8.73 लाख मीट्रिक टन माम्ली का उत्पादन हुआ बार जो 2024-25 में बढ़कर 958 लाख मीट्रिक टन हो गया। वर्तमान में बिहार, देश में आंतरिक मत्स्य उत्पादन में चौथे स्थान पर है। राज्य से 39.07 हजार टन मछली नेपाल, लुधियाना, अमृतसर, सिल्लीगुडी, बनारस गोरखपुर, राँची आदि शहरों को भेजी जा रही है. जो इसके निर्यात क्षमताओं को दर्शाता है।
राज्य सरकार द्वारा मत्स्य बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र में अब तक 232 मत्स्य बीज हैचारियों की स्थापना की गई है. जिनमें से 167 हैचरियों क्रियाशील है। वर्ष 2024-25 में 2100 मिलियन बीज उत्पादन के लक्ष्य के विरुद्ध 2044.29 मिलियन बीजों का उत्पादन सफलतापूर्वक किया गया है। मत्स्यपालकों के कौशल विकास के लिए अब तक राज्य में कुल 62.415 मालय कृषकों को विभाग द्वारा निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिनमें से 16.999 कृषकों को ICAR संस्थानों में और 45,417 को राज्य के अंदर प्रशिक्षित किया गया है।
मत्स्य विकास को और अधिक वैज्ञानिक एवं लाभकारी बनाने हेतु बिहार सरकार द्वारा “बिहार राज्य जलाशय मारिस्यकी नीति को स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत राज्य के जलाशयों में केज एवं चेन आधारित मत्स्यपालन को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिस से न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होगे।
माननीय मंत्री श्रीमती रेणु देवी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि बिहार को देश में मत्स्य उत्पादन में शीर्ष पर और इसके लिए सरकार द्वारा हर आवश्यक संसाधन, तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। इस अवसर पर डा० एकलाकुल रहमान का संबोधन बोचक/एएस तकनीक से मत्स्य पालन एवं प्रबंधन के विषय पर हुआ तथा योजना के संबंध में जानकारी संयुक्त मत्स्य निदेशक, श्री दिलीप कुमार सिंह के द्वारा दिया गया, इसके अलावा समाज कल्याण विभाग के प्रतिनिधि के द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं से उत्पीड़न के विरुद्ध प्रावधान पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सतत जनकृषि वैज्ञानिक मत्स्यपालन और जल संसाधनों को बेहतर प्रबंधन को माध्यम से बिहार को मत्स्य पालन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और अग्रणी राज्य बनाया जाएगा।
