कोटा: पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान उपाध्यक्ष मनोहर राज ने खोला विकास पर मोर्चा
बिलासपुर/कोटा
जनपद पंचायत कोटा के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान उपाध्यक्ष मनोहर राज ने 10 महीने के कार्यकाल के बाद वर्तमान जनपद प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 5 साल की तुलना में इस साल विकास की रफ्तार बेहद धीमी है। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों और वर्तमान अध्यक्ष की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया है।
मनोहर राज का अनुभव बनाम मौजूदा हालात
मनोहर राज 2015-2020 तक जनपद पंचायत कोटा के अध्यक्ष रह चुके हैं। इस बार वे उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए हैं। पूर्व अध्यक्ष के रूप में पंचायत व्यवस्था की गहरी समझ रखने वाले मनोहर राज का कहना है, “मेरे कार्यकाल में हर साल 200 से अधिक विकास कार्य होते थे। 15वें वित्त का 90% उपयोग होता था। लेकिन अब 10 महीने में 50 काम भी ढंग से नहीं हुए।”
क्या बोले मनोहर राज?
“वर्तमान अध्यक्ष क्षेत्र के विकास के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। 10 महीने में 74 पंचायतों में से 10 में भी दौरा नहीं किया। सामान्य सभा की बैठक 2 बार ही हुई। मनरेगा मजदूरों का 6 महीने से भुगतान लंबित है। CC रोड-अधूरे पड़े हैं। राज्य सरकार भी फंड जारी नहीं कर रही। DMF का पैसा कलेक्टर रोके बैठे हैं।”
प्रमुख आरोप
1. *काम स्वीकृति में भेदभाव:* चुनिंदा पंचायतों में ही काम दिए जा रहे हैं।
2. *प्रशासनिक निष्क्रियता:* BEO-CEO कार्यालय में फाइलें दबाकर बैठे हैं।
3. *राजनीतिक दबाव:* बिना विधायक की सहमति के काम स्वीकृत नहीं हो रहे।
4. *जमीनी पकड़ नहीं:* अध्यक्ष जनता के बीच नहीं जाते, समस्याएं सुनते नहीं।
मैं विपक्ष में नहीं, जनता के साथ हूं’
मनोहर राज ने स्पष्ट किया, “मैं विपक्ष की भूमिका में नहीं हूं। उपाध्यक्ष हूं, इसलिए गलत का विरोध करना मेरा कर्तव्य है। पिछले कार्यकाल में मैंने जो सिस्टम बनाया था, वो ध्वस्त हो रहा है। पंचायत सचिवों पर दबाव है, सरपंच परेशान हैं।”
आगे की चेतावनी
मनोहर राज ने कहा कि यदि 15 दिन में विकास कार्यों में तेजी नहीं आई तो वे जनपद सदस्यों और सरपंचों के साथ कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे। “अविश्वास प्रस्ताव अंतिम विकल्प है। पहले हम कोशिश करेंगे कि अध्यक्ष जी सुधर जाएं और जनता का काम करें।”
राजनीतिक मायने
पूर्व अध्यक्ष होने के नाते मनोहर राज की बात को वजन मिल रहा है। उनके आरोपों के बाद कोटा जनपद की राजनीति गरमा गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा है कि अनुभवी नेता के रूप में मनोहर राज की बात को नकारा नहीं जा सकता।
वर्तमान अध्यक्ष की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जनपद CEO ने कहा, “फंड की कमी और तकनीकी कारणों से कुछ काम रुके हैं। जल्द गति लाई जाएगी।”
