दिवाली में आँखों की सुरक्षा को लेकर ‘चश्मा नहीं, पटाखे नहीं’ अभियान शुरू

दिवाली में आँखों की सुरक्षा को लेकर ‘चश्मा नहीं, पटाखे नहीं’ अभियान शुरू
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पटना, 8 अक्टूबर। विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर शंकर ज्योति विज़न फाउंडेशन एवं शंकर ज्योति नेत्रालय, पटना की ओर से दिवाली पर आँखों की सुरक्षा को लेकर ‘चश्मा नहीं, पटाखे नहीं!’ जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। यह अभियान 8 अक्टूबर से 8 नवंबर 2026 तक चलाया जाएगा।
अभियान का उद्देश्य पटाखों से होने वाली आँखों की चोटों को रोकना, बच्चों एवं किशोरों को पटाखों से दूर रखने तथा प्रमाणित सुरक्षा चश्मों के इस्तेमाल के प्रति लोगों को जागरूक करना है। अभियान के तहत स्कूलों और विभिन्न समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संस्था ने 10 हजार सुरक्षा चश्मे वितरित करने का लक्ष्य रखा है।
विट्रियोरेटिनल सर्जन डॉ. गौतम कुमार ने कहा कि दिवाली की खुशियां किसी की आंखों की रोशनी छिनने का कारण नहीं बननी चाहिए। उन्होंने बच्चों को पटाखों से दूर रखने और अभिभावकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की।
अभियान के आयोजकों के अनुसार, दिवाली के दौरान पटाखों से आँखों में चोट के मामले सामने आते रहे हैं। अक्टूबर 2025 में प्रकाशित स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, पटना के RIO और IGIMS में दिवाली के दौरान करीब 50 बच्चे पटाखों से आंखों की चोट के साथ पहुंचे थे, जिनमें 18 को ऑपरेशन की जरूरत पड़ी। वहीं AIIMS नई दिल्ली के संबंधित आंकड़ों में दिवाली के दौरान आंखों की चोट के मामले 2024 के 160 से बढ़कर 2025 में 190 बताए गए। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि ये संबंधित अस्पतालों के आंकड़े हैं, पूरे बिहार या देश के कुल आंकड़े नहीं।
चिकित्सकों ने बच्चों और किशोरों में कार्बाइड गन के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई। विशेषज्ञों के अनुसार विस्फोट, उड़ते हुए टुकड़ों और रासायनिक जलन से आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि कार्बाइड गन खिलौना नहीं है और सुरक्षा चश्मा पहनने से भी इसका इस्तेमाल सुरक्षित नहीं हो जाता।
अभियान के तहत राज्य सरकार से स्कूलों में दिवाली नेत्र सुरक्षा संबंधी जागरूकता कार्यक्रम चलाने, अभिभावकों तक सरल भाषा में सुरक्षा संदेश पहुंचाने तथा कार्बाइड गन की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी निगरानी की अपील की गई है। साथ ही प्रत्येक जिले में नेत्र-आपातकालीन सेवाओं, अस्पतालों और संपर्क नंबरों की जानकारी सार्वजनिक करने का सुझाव दिया गया है।
कॉर्निया विशेषज्ञ डॉ. समीक्षा ने कहा कि आंख में चोट लगने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। आंख को मलने या दबाने, फंसे हुए टुकड़े को खुद निकालने अथवा बिना चिकित्सकीय सलाह कोई दवा या घरेलू नुस्खा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि गहरी चोट, आंख कटने या कोई टुकड़ा धंसने की आशंका में आंख को धोने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और तत्काल नेत्र अस्पताल पहुंचना चाहिए। केवल स्पष्ट रासायनिक छींटे की स्थिति में, यदि कटने या टुकड़ा धंसने की आशंका न हो, तो साफ बहते पानी से कम-से-कम 20 मिनट तक आंख धोते हुए तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
विट्रियोरेटिनल सर्जन डॉ. शुभम ने कहा कि बाहर से छोटी दिखने वाली चोट भी आंख के भीतर गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। पटाखों से आंख के अंदर रक्तस्राव और रेटिना को नुकसान हो सकता है तथा गंभीर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की कि बच्चे पटाखे, फुलझड़ी और कार्बाइड गन से दूर रहें। पटाखों के आसपास रहने वाले वयस्क और दर्शक उचित प्रमाणित सुरक्षा चश्मे का इस्तेमाल करें तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य नजर का चश्मा या धूप का चश्मा सुरक्षा चश्मे का विकल्प नहीं है।
फाउंडेशन ने अभिभावकों, स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं, प्रशासन और मीडिया से अभियान का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की है।

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