जनपद मेरा है, दोबारा आए तो बाहर फेंकवा दूंगी’ – जनपद अध्यक्ष ने पत्रकार को दी धमकी; सत्ता के नशे में भूलीं मर्यादा, बोलीं- ‘कार्यालय में मत आना’

बिलासपुर/कोटा

“जनपद पंचायत हमारा है, आज के बाद हमारे जनपद कार्यालय में मत आ जाना। दोबारा आए तो बाहर फेंकवा दूंगी।” यह धमकी किसी और ने नहीं, बल्कि जनपद पंचायत कोटा की अध्यक्ष ने पब्लिक आई न्यूज़ के रिपोर्टर को दी। वह भी जनपद कार्यालय में बैठकर अपने चार-पांच साथियों के सामने।

वजह सिर्फ इतनी थी कि पब्लिक आई ने पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान उपाध्यक्ष मनोहर राज का बयान प्रकाशित किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि “पिछले 1 साल से क्षेत्र का विकास बहुत धीमी गति से हो रहा है।”

*क्या है पूरा मामला?*

पब्लिक आई ने 5 मई को मनोहर राज के हवाले से खबर चलाई थी कि “10 महीने में कोटा जनपद में विकास ठप है। अध्यक्ष की उदासीनता जिम्मेदार है।” खबर प्रसारित होते ही जनपद अध्यक्ष बौखला गईं। उन्होंने रिपोर्टर को कार्यालय के बाहर देखकर जनपद कार्यालय बुलाया और साथियों के सामने धमकाना शुरू कर दिया।

*धमकी में क्या कहा अध्यक्ष ने?*

“तुमने मनोहर राज का बयान क्यों चलाया? जनपद के अंदर मत घुसना। यह जनपद पंचायत हमारा है। आज के बाद हमारे जनपद कार्यालय में मत आ जाना। दोबारा आए तो बाहर फेंकवा दूंगी। हमें बदनाम कर रहे हो।”

*सत्ता के नशे में भूलीं संवैधानिक मर्यादा*

शायद जनपद अध्यक्ष भूल गईं कि कोई भी शासकीय भवन किसी एक व्यक्ति का नहीं होता। वह सिर्फ 5 साल के लिए चुनी गई अध्यक्ष हैं। उन्हें यह अधिकार नहीं है कि किसी पत्रकार या आम नागरिक को सरकारी कार्यालय में घुसने से मना कर सकें। जनपद कार्यालय जनता का है, किसी की निजी जागीर नहीं।

1. *क्या नेताओं के इशारे पर काम करेंगे मीडिया कर्मी?* क्या अब पत्रकारों को खबर छापने से पहले नेताओं से परमिशन लेनी पड़ेगी?

2. *क्या सिर्फ अच्छाइयां दिखानी हैं?* क्या जनप्रतिनिधियों की नाकामी, लापरवाही और बुराइयां जनता के सामने नहीं आनी चाहिए?

पब्लिक आई के संवाददाता ने कहा, “मैंने सिर्फ जनहित का मुद्दा उठाया था। उपाध्यक्ष का बयान था, जनता की परेशानी थी। अध्यक्ष का पक्ष लेने के लिए भी मिला लेकिन अध्यक्ष के पास इतना समय नहीं था कि वह अपना बयान दे सके उन्होंने कहा मैं बाद में आपसे मिलती हूं किया था, पर उन्होंने जवाब नहीं दिया। अब धमकी दे रही हैं। मैं डरूंगा नहीं।”

*लोकतंत्र खतरे में*

कोटा की इस घटना ने साफ कर दिया है कि जमीनी सच्चाई दिखाने पर नेताओं को मिर्ची लगती है। जब एक निर्वाचित अध्यक्ष पत्रकार को ‘बाहर फेंकवाने’ की धमकी दे रही है, तो सोचिए आम आदमी शिकायत लेकर जाएगा तो उसके साथ क्या सलूक होगा?

पब्लिक आई ऐसी धमकियों से डरने वाला नहीं है। हम जनता के मुद्दे उठाते रहेंगे।

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