वाल्मीकिनगर में इकोटूरिज्म को मिलेगा नया विस्तार, औषधीय पौधों की होगी ब्रांडिंग : मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद

वाल्मीकि व्याघ्र संरक्षण फाउंडेशन की सातवीं शासी परिषद बैठक में कई अहम फैसले, बाघों की संख्या 8 से बढ़कर 54 पहुंची
पटना, 15 जुलाई। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार के मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में अरण्य भवन, पटना में वाल्मीकि व्याघ्र संरक्षण फाउंडेशन (न्यास) की शासी परिषद की सातवीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष के संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन, इकोटूरिज्म के विस्तार तथा विभिन्न विकासात्मक योजनाओं की समीक्षा की
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने कहा कि वाल्मीकिनगर देश के महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्रों में शामिल है। यहां उपलब्ध औषधीय पौधों और वन संपदा की वैज्ञानिक पहचान एवं ब्रांडिंग के लिए विभाग समग्र कार्ययोजना तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर, गोवर्धना और मंगुराहा सहित आसपास के पर्यटन स्थलों पर सड़क, कैंटीन, होमस्टे, मोबाइल नेटवर्क, बिजली, प्रशिक्षित टूरिस्ट गाइड और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

मंत्री ने बताया कि स्थानीय युवाओं को पर्यटन गाइड के रूप में प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही सोमेश्वर पहाड़ क्षेत्र में रोपवे, गंडक नदी क्षेत्र में जल-आधारित पर्यटन तथा अन्य पर्यटन परियोजनाओं को भी विकसित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य के सफल संरक्षण प्रयासों के कारण वर्ष 2010 में जहां वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष में केवल 8 बाघ थे, वहीं वर्तमान में उनकी संख्या बढ़कर 54 हो गई है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या भी बिहार में इकोटूरिज्म के प्रति बढ़ते आकर्षण का संकेत है’
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय समुदायों की सहभागिता को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में सांसद सुनील कुमार, अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, विशेष सचिव राजीव कुमार श्रीवास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरविंदर सिंह, मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक अभय कुमार सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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