भाकपा-माले बिहार राज्य कमिटी की बैठक सम्पन्न, राज्य सम्मेलन की तैयारियों पर जोर
पटना 3 मई 2026
भाकपा-माले बिहार राज्य कमिटी की दो दिवसीय बैठक 2-3 मई को पटना स्थित राज्य कार्यालय में सम्पन्न हुई. बैठक में पार्टी महासचिव कॉ. दीपांकर भट्टाचार्य, स्वदेश भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, धीरेंद्र झा, सांसद राजाराम सिंह, अमर, मीना तिवारी, शशि यादव समेत राज्य कमिटी के सदस्य शामिल हुए. बैठक में राज्य की राजनीतिक स्थिति, जनसंघर्षों की दिशा तथा संगठनात्मक सवालों पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया.
बैठक में बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा-स्वास्थ्य की बदहाल स्थिति, किसानों-मजदूरों की समस्याओं तथा लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते हमलों पर विस्तार से चर्चा हुई. नेताओं ने कहा कि जनता के बुनियादी सवालों को लेकर संघर्ष तेज करने की जरूरत है.
बैठक में यह भी कहा गया कि बिहार में भाजपा द्वारा सत्ता को पूरी तरह हड़प लिया गया है. इसके खिलाफ बिहार में जनांदोलनों का
ऐसे समय में भाकपा-माले की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह जनता के बीच मजबूती से हस्तक्षेप करे.
बैठक में आगामी 16-18 मई को दरभंगा में होने वाले पार्टी के 12वें बिहार राज्य सम्मेलन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई.
सम्मेलन को सफल बनाने के लिए विभिन्न समितियों द्वारा किए जा रहे कार्यों, प्रतिनिधियों के चयन, आवास, प्रचार-प्रसार, आर्थिक सहयोग संग्रह तथा जनसंपर्क अभियान की स्थिति पर चर्चा हुई.
नेताओं ने कहा कि यह सम्मेलन बिहार की राजनीति और पार्टी संगठन के लिहाज से महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा, जिसमें आने वाले दौर की राजनीतिक दिशा और संगठनात्मक कार्यभार तय किए जाएंगे.
बैठक में निर्णय लिया गया कि सम्मेलन को सफल बनाने के लिए राज्यभर में अभियान और तेज किया जाएगा. गांवों, कस्बों, पंचायतों, प्रखंडों तथा जिला स्तर पर सभाएं, बैठकें, जनसंपर्क अभियान और सदस्य संपर्क कार्यक्रम चलाए जाएंगे.
साथ ही पार्टी संगठन को और मजबूत करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने, युवाओं-छात्रों-महिलाओं के बीच सक्रियता बढ़ाने तथा जनआंदोलनों को व्यापक बनाने पर जोर दिया गया.
बैठक ने पार्टी के डेढ़ लाख सदस्यों, समर्थकों, शुभचिंतकों तथा बिहार की व्यापक जनता से अपील की है कि वे आगामी राज्य सम्मेलन को सफल बनाने के लिए स्वेच्छा से हरसंभव सहयोग करें.
पार्टी ने कहा कि यह सम्मेलन सिर्फ संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बिहार में जनवादी, धर्मनिरपेक्ष और जनपक्षधर राजनीति को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है.
