पटना, 19 अगस्त 2026। बिहार के मधेपुरा में एल्सटॉम और इंडियन रेलवे के संयुक्त उपक्रम मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड यानी एमईएलपीएल ने बिहार और देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दिया है।
एक सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 से 2026 के बीच इस प्रोजेक्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 60 हजार करोड़ रुपये के आर्थिक आउटपुट और 23,800 करोड़ रुपये की ग्रॉस वैल्यू एडेड में योगदान दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में एमईएलपीएल का योगदान बिहार के कुल जीएसटी के करीब एक प्रतिशत के बराबर रहा। वहीं, मधेपुरा जिले के जीडीडीपी में प्रत्यक्ष जीवीए की हिस्सेदारी करीब 4.6 प्रतिशत रही।
प्रोजेक्ट ने करीब 90 प्रतिशत लोकलाइजेशन हासिल कर ‘मेक इन इंडिया’ को भी मजबूती दी है। मधेपुरा में तैयार होने वाले 12 हजार हॉर्सपावर के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव भारत की फ्रेट मोबिलिटी को नई ताकत दे रहे हैं।
एमईएलपीएल ने देश में हर साल औसतन करीब 2,300 रोजगार पैदा किए हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़े सीएसआर कार्यक्रमों पर मधेपुरा में 17 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।
कंपनी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट ने स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर देने, कुशल युवाओं को बिहार में काम उपलब्ध कराने और पलायन कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मधेपुरा में निर्मित 12 हजार हॉर्सपावर के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव देश के समर्पित फ्रेट कॉरिडोर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने और परिवहन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एल्सटॉम और रेलवे मंत्रालय के बीच करीब 3.5 बिलियन यूरो का यह संयुक्त उपक्रम भारत के रेल क्षेत्र में सबसे बड़े विदेशी प्रत्यक्ष निवेशों में से एक है। इसके तहत मधेपुरा में 800 हाई-पावर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के निर्माण और रखरखाव का काम किया जा रहा है।

