


पटना, 26 अक्टूबर। बिहार के पारंपरिक कृषि उत्पाद मिथिला मखाना को देशभर में नई पहचान दिलाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में खेतिका ने बड़ी पहल की है। कंपनी ने अपने मखाना कारोबार के विस्तार के लिए चरणबद्ध तरीके से 20 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। इसके तहत पटना में 35 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में विशेष मखाना प्रोसेसिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की गई है। कंपनी का लक्ष्य मखाने को पारंपरिक उपयोग से आगे बढ़ाकर रोजमर्रा की स्नैकिंग का लोकप्रिय विकल्प बनाना है।
खेतिका ने अपने मखाना कारोबार के विस्तार के तहत पांच नए फ्लेवर वाले स्नैक्स बाजार में उतारे हैं। इनमें कोरियन किमची, पेरी पेरी, लाइम एंड चिली, हिमालयन पिंक सॉल्ट और सॉल्ट एंड पेपर शामिल हैं। इन उत्पादों के छोटे पैक की शुरुआती अधिकतम खुदरा कीमत 50 रुपये रखी गई है। कंपनी के अनुसार, अलग-अलग उत्पादों में ऑलिव ऑयल में रोस्टिंग, प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल नहीं करने और ग्लूटेन-फ्री फॉर्मूलेशन जैसी विशेषताएं शामिल हैं।
500 मीट्रिक टन सालाना प्रोसेसिंग क्षमता
पटना में स्थापित नई यूनिट कंपनी की प्रमुख विनिर्माण इकाइयों में शामिल है। इसकी सालाना प्रोसेसिंग क्षमता 500 मीट्रिक टन है। यहां मखाने की सफाई, ग्रेडिंग, रोस्टिंग, पॉपिंग, फ्लेवरिंग और पैकेजिंग सहित विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। कंपनी के मुताबिक, यह इस वर्ष भारत में स्थापित उसकी दूसरी नई यूनिट है। इसके साथ खेतिका की कुल यूनिट्स की संख्या बढ़कर सात हो गई है।
कंपनी का कहना है कि 20 करोड़ रुपये का निवेश केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें मखाने की सोर्सिंग, उत्पाद विकास, मार्केटिंग, ब्रांडिंग, सप्लाई चेन और निर्यात से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य मखाना कारोबार के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा विकसित करना और भविष्य में इसकी बाजार पहुंच बढ़ाना है।
बिहार के किसानों से सीधे खरीद
खेतिका की रणनीति में बिहार के मखाना उत्पादक किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनी के अनुसार, वह पूर्णिया, कटिहार, दरभंगा, सीतामढ़ी और मधुबनी जैसे क्षेत्रों के किसानों से 100 प्रतिशत मिथिला मखाना सीधे खरीदती है। पटना में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होने से मखाना उत्पादक क्षेत्रों से प्राप्त उपज का प्रसंस्करण बेहतर तरीके से करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कंपनी का दावा है कि इससे उत्पाद की गुणवत्ता, ताजगी और सप्लाई चेन में पारदर्शिता बनाए रखने में सहायता मिलेगी। साथ ही, बिहार में मखाना उद्योग से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। कंपनी की योजना मखाना उत्पादक क्षेत्रों में साथी केंद्र स्थापित करने की भी है, ताकि किसानों के साथ जुड़ाव और सहयोग को मजबूत किया जा सके।
तीन वर्षों में ₹500 करोड़ के कारोबार का लक्ष्य
खेतिका के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पृथ्वी सिंह ने कहा कि कंपनी मिथिला के पारंपरिक उत्पाद को देशभर के उपभोक्ताओं तक पहुंचाना चाहती है। उनके अनुसार, मखाने को आधुनिक स्नैकिंग का हिस्सा बनाने के लिए सोर्सिंग, मैन्युफैक्चरिंग और उत्पाद विकास में विशेष क्षमताएं विकसित की जा रही हैं।
कंपनी के अनुमान के मुताबिक, भारत में मखाने का बाजार करीब 10 हजार करोड़ रुपये का है। खेतिका ने अगले तीन वर्षों में इस बाजार में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जो लगभग 500 करोड़ रुपये के कारोबार की महत्वाकांक्षा के बराबर है। कंपनी को उम्मीद है कि भविष्य में मखाना उसके कुल राजस्व में लगभग 20 प्रतिशत योगदान देगा।
अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व तक पहुंचाने की तैयारी
घरेलू बाजार में विस्तार के साथ कंपनी की योजना मिथिला मखाना को अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के बाजारों तक पहुंचाने की है। कंपनी अपने उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, क्विक-कॉमर्स सेवाओं, खुदरा दुकानों और अपनी वेबसाइट के माध्यम से देशभर में उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।
भविष्य में मखाना चिप्स, मखाना मिक्स और अन्य नए स्नैक्स भी पेश किए जा सकते हैं। इसके अलावा, कंपनी की आगामी स्नैकिंग रेंज में बीजों से बने स्नैक्स और खजूर आधारित उत्पाद शामिल करने की योजना है।
खेतिका का यह विस्तार बिहार के पारंपरिक कृषि उत्पादों को आधुनिक खाद्य उद्योग से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, निवेश से रोजगार, किसानों को मिलने वाले लाभ और निर्यात के वास्तविक परिणाम कंपनी की आगामी योजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
