ब्लैकलिस्टेड कंपनियां फिर सक्रिय? PMKSY की ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ योजना में बड़े घोटाले का आरोप

CFTUI प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने कृषि निदेशक से की शिकायत, 2023 में ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों पर फिर से घटिया सामग्री आपूर्ति और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप।
हजारीबाग।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) की ‘प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC)’ योजना में एक बार फिर बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट में योजना के क्रियान्वयन में गंभीर गड़बड़ियों का उल्लेख होने के बाद अब सीएफटीयूआई (CFTUI) के प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने भी कृषि निदेशक, झारखंड को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
संतोष कुमार सिंह ने अपने शिकायत पत्र में कहा है कि वर्ष 2022-23 में योजना की जांच के दौरान भारी अनियमितताएं उजागर हुई थीं। इसके बाद 1 सितंबर 2023 को कृषि विभाग ने 13 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट (काली सूची) में डाल दिया था। इनमें मोहित इंडिया, मकनो इंडस्ट्रीज, ग्लोबल इलेक्ट्रो मैकेनिकल इक्विपमेंट्स, प्रीमियर इरिगेशन एडिटेक, निबस पाइप्स सहित कई कंपनियां शामिल थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय आदेश के बावजूद ये ब्लैकलिस्टेड कंपनियां आज भी परोक्ष रूप से योजना में सक्रिय हैं और किसानों को घटिया गुणवत्ता की सामग्री की आपूर्ति कर रही हैं। उनका कहना है कि कृषि निदेशालय के कुछ अधिकारियों और संबंधित कंपनियों के बीच कथित गठजोड़ के कारण कार्रवाई प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो रही है।
इससे पहले वर्ष 2023 में गठित संयुक्त जांच समिति ने हजारीबाग जिले के बरही, चौपारण, इचाक और अन्य प्रखंडों में योजना के भौतिक सत्यापन के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया था। जांच में पाया गया कि कई स्थानों पर लाभुकों के नाम पर ड्रिप इरिगेशन सिस्टम स्थापित ही नहीं किया गया, कई जगह उपकरण खेतों में बिखरे मिले, जबकि कुछ स्थानों पर योजना को स्वीकृत स्थल के बजाय दूसरे स्थान पर स्थापित कर दिया गया।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई मामलों में लाभुक और भूमि का सत्यापन सही तरीके से नहीं किया गया तथा जिन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पर्याप्त जल स्रोत उपलब्ध नहीं थे, वहां भी योजना स्वीकृत कर दी गई। समिति ने इसे योजना की मार्गदर्शिका का उल्लंघन मानते हुए संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए थे।
इसी बीच 29 जुलाई 2026 को जिला कृषि पदाधिकारी, हजारीबाग द्वारा लगभग 1.94 करोड़ रुपये के भुगतान की स्वीकृति आदेश जारी किए जाने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस आदेश के बाद योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीएफटीयूआई प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने मांग की है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनियों की भूमिका की दोबारा जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए तथा किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी धन के दुरुपयोग के साथ-साथ किसानों का भरोसा भी योजनाओं से उठ जाएगा।

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