सम्राट चौधरी के शपथ लेते ही सरावगी ने दिलाया भरोसा, बोले- बिहार की जनता की सेवा में कोई कमी नहीं है
पटना, 16 अप्रैल, 2026: बिहार में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कार्यकर्ताओं के नाम एक पत्र लिखकर अपनी खुशी साझा की है। पत्र में उन्होंने नई सरकार को ‘परिवर्तन नहीं निरंतरता’ बताते हुए ‘सुशासन से समृद्धि’ का नारा दिया है।
‘जय श्रीराम’ से किया अभिवादन:
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने ‘जय श्रीराम’ के जरिये कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते हुए लिखा कि यह दिन हम सभी के लिए अत्यंत हर्ष एवं गौरव का है। उन्होंने कहा कि ऊर्जावान, लोकप्रिय एवं कर्मठ नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और यह दशकों के अथक परिश्रम, त्याग और बलिदान का प्रतिफल है। इसका श्रेय बूथ से लेकर प्रदेश तक हर कार्यकर्ता के समर्पण को दिया।
‘सुशासन की नींव पर नया अध्याय’:
पत्र में सरावगी ने लिखा, “हम विनम्रतापूर्वक यह कहते हुए गर्व अनुभव करते हैं कि पहली बार बिहार में सरकार का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री के हाथों में है।” उन्होंने इसे परिवर्तन नहीं, निरंतरता बताया और कहा कि सुशासन की उसी नींव पर, उसी प्रतिबद्धता के साथ, अब और अधिक संकल्प एवं ऊर्जा के साथ बिहार के विकास का नया अध्याय लिखा जाएगा।
जदयू के डिप्टी सीएम को दी बधाई:
सरावगी ने जनता दल (यूनाइटेड) के विजय कुमार चौधरी एवं बिजेन्द्र प्रसाद यादव के उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ पर भी हार्दिक बधाई दी है।
‘सुशासन से समृद्धि युग’ का किया ऐलान:
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विश्वास दिलाया कि “पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुदृढ़ नींव पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कुशल मार्गदर्शन में बिहार के विकास को हम नई गति देंगे। सुशासन से समृद्धि युग, बिहार अभ्युदय काल का शुभारंभ हो चुका है।”
कार्यकर्ताओं से लिया संकल्प:
सरावगी ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हम सब मिलकर संकल्प लें कि बिहार की जनता की सेवा में कोई कमी नहीं आने देंगे। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का उत्साह एवं समर्पण ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
पहले भी दे चुके ‘SAMMAN’ मंत्र:
गौरतलब है कि इसके पूर्व भी प्रदेश अध्यक्ष सरावगी कार्यकर्ताओं को नैतिक आचरण के लिए “SAMMAN” के रूप में 6 सूत्रीय आचार-संहिता दे चुके हैं, जिसे संगठन में व्यापक रूप से सराहा गया था।
