महान जनजातीय नेता को दी गई श्रद्धांजलि, वक्ताओं ने उनके आदर्शों को आत्मसात करने का किया आह्वान


गुमला। महान जनजातीय नेता, समाज सुधारक एवं आदिवासी समाज के उत्थान के प्रबल पक्षधर बाबा कार्तिक उरांव की जयंती के अवसर पर सिलम चौक पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई। पूर्व पुलिस अधिकारी एवं समाजसेवी जगरनाथ उरांव के सौजन्य से स्थापित इस प्रतिमा के साथ ही सिलम चौक का नामकरण बाबा कार्तिक उरांव चौक के रूप में किया गया। इस पहल को जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक अस्मिता और महापुरुषों के योगदान को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रतिमा स्थापना कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ हुई। बैगा पुजारों ने निर्धारित स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया। इसके बाद बाबा कार्तिक उरांव की प्रतिमा स्थापित की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने उनके व्यक्तित्व, विचारों और समाज के प्रति योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व पुलिस अधिकारी एवं समाजसेवी जगरनाथ उरांव ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का जीवन समाज के प्रति समर्पण, संघर्ष और जनसेवा की प्रेरणा देता है। उन्होंने अपना जीवन जनजातीय समाज के अधिकारों, सम्मान, शिक्षा और विकास के लिए समर्पित किया। उनके विचार आज भी समाज को जागरूक, संगठित और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमा स्थापित करने का उद्देश्य केवल उन्हें याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों और आदर्शों से परिचित कराना भी है।
पूर्व उप विकास आयुक्त पुनई उरांव ने भी बाबा कार्तिक उरांव के राष्ट्र और जनजातीय समाज के प्रति योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का जीवन कर्तव्यबोध, एकता और सामाजिक जागरूकता का संदेश देता है। उनके आदर्शों को अपनाकर ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने लोगों से उनके बताए मार्ग पर चलने और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने की अपील की।
वक्ताओं ने कहा कि महापुरुषों की स्मृति को सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित करना ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने का प्रभावी माध्यम है। सिलम चौक का नाम बाबा कार्तिक उरांव के नाम पर रखे जाने से स्थानीय लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम में समाजसेवी मिसिर कुजूर, डॉ. परमेश्वर भगत, हितेश्वर भगत, डोमन राम मोची, पूर्व लेफ्टिनेंट राम प्रसाद उरांव, पूर्व सैनिक जोगी उरांव, पूर्व सैनिक विनोद बिहारी और महावीर साहू सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर बाबा कार्तिक उरांव के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया।
प्रतिमा स्थापना एवं चौक के नामकरण के माध्यम से सिलम में बाबा कार्तिक उरांव की स्मृतियों को स्थायी पहचान देने की पहल की गई। कार्यक्रम ने लोगों को उनके आदर्शों को अपनाने, समाज के विकास में योगदान देने और अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
