लालू परिवार को यह समझना होगा कि यह लोकतंत्र है, कोई राजतांत्रिक व्यवस्था नहीं जहाँ सत्ता चली जाए लेकिन सरकारी आवास पर अधिकार बना रहे। आवास सरकार नियमों के तहत आवंटित करती है, परिवारवाद की मानसिकता के आधार पर नहीं।पद बदलने के साथ सुविधाएँ भी बदलती हैं — यही संवैधानिक व्यवस्था है। सरकारी बंगला किसी की निजी जागीर या पारिवारिक विरासत नहीं होता। और अगर किसी दलित मंत्री को आवंटित आवास से समस्या है, तो लालू परिवार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए। सामाजिक न्याय की राजनीति का दावा करने वालों को दलित समाज से आने वाले मंत्रियों के सम्मान और अधिकार का भी सम्मान करना चाहिए। उनको बंगला सरकार ने आवंटित किया है उसमें जाना चाहिए। लोकतंत्र में संविधान सर्वोपरि होता है, परिवार नहीं। यही बात लालू परिवार को समझनी होगी।
