पटना में इकोटूरिज्म इन्वेस्टर्स मीट-2026: बिहार में इकोटूरिज्म निवेश का नया अध्याय शुरू

PPP मॉडल के तहत 29 जलाशयों और 247 आर्द्रभूमियों में निवेश के अवसर, 50 से अधिक निवेशकों ने दिखाई रुचि

पटना, 13 जुलाई। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार द्वारा सोमवार को पटना के होटल मौर्या में ‘इकोटूरिज्म इन्वेस्टर्स मीट-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य राज्य में इकोटूरिज्म के सुनियोजित विकास को गति देना, निजी निवेश को आकर्षित करना तथा सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP) मॉडल के माध्यम से पर्यटन अवसंरचना को सशक्त बनाना था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए 50 से अधिक निवेशकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, पर्यटन विशेषज्ञों तथा विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरविंदर सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने कहा कि बिहार प्राकृतिक संसाधनों, जलाशयों और जैव विविधता से समृद्ध राज्य है। इकोटूरिज्म केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण और हरित अर्थव्यवस्था के निर्माण का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी और निवेश संबंधी सभी प्रक्रियाओं को सरल एवं समयबद्ध बनाया जाएगा।

अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने इकोटूरिज्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। राजगीर नेचर सफारी, जू सफारी, ग्लास ब्रिज, घोड़ाकटोरा, ककोलत जलप्रपात, भीमबांध, मंदार हिल और करमचट डैम जैसे स्थलों पर पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में उपलब्ध जलाशयों और आर्द्रभूमियों के कारण एडवेंचर टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स के विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

सम्मेलन में निवेशकों के समक्ष 29 बड़े जलाशयों तथा 247 तालाबों, पोखरों, झीलों एवं आर्द्रभूमियों पर विकसित की जाने वाली इकोटूरिज्म परियोजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। विभाग ने बताया कि परियोजनाओं को दो श्रेणियों—ग्रुप-ए और ग्रुप-बी—में विभाजित किया गया है। ग्रुप-ए में बड़े जलाशयों पर आधारित परियोजनाएं तथा ग्रुप-बी में तालाब, पोखर, झील और अन्य जल निकायों से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। चयनित एजेंसियों को परियोजना स्थल 30 वर्षों की लीज पर उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही आवश्यक विभागीय अनुमतियां समयबद्ध तरीके से प्रदान की जाएंगी। परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) की सुविधा भी उपलब्ध होगी तथा बिहार पर्यटन नीति के अंतर्गत मिलने वाले विभिन्न प्रोत्साहनों का लाभ भी निवेशकों को दिया जाएगा।

सम्मेलन के दौरान विभाग ने बताया कि भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य में इकोटूरिज्म परियोजना के विकास के लिए जारी Request for Proposal (RFP) की अंतिम तिथि 28 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। वहीं राज्य के चयनित स्थलों पर एडवेंचर टूरिज्म एवं वाटर स्पोर्ट्स सुविधाओं के विकास, संचालन और अनुरक्षण के लिए Expression of Interest (EOI) आमंत्रित किए गए हैं, जिसकी अंतिम तिथि 6 अगस्त 2026 तय की गई है।

पर्यटन विकास के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए विभाग ने बताया कि राजगीर नेचर सफारी में वर्ष 2022-23 में लगभग 1.59 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2024-25 में यह संख्या बढ़कर लगभग 3 लाख हो गई। इसी प्रकार मंदार हिल, करमचट डैम, नागी-नकटी पक्षी अभयारण्य, भीमबांध इकोटूरिज्म सेंटर और वाल्मीकिनगर इकोटूरिज्म क्षेत्र में भी पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो बिहार में इकोटूरिज्म के बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है।

कार्यक्रम में बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (BCCI), कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII), बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (BIA) सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और राज्य में इकोटूरिज्म क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

सम्मेलन के समापन पर विभाग ने विश्वास व्यक्त किया कि निजी निवेश, सरकारी सहयोग और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से बिहार आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख इकोटूरिज्म राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

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