अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने किया स्थलीय निरीक्षण, ईको-फ्रेंडली विकास, सरोत्तर झील, जेन पार्क, ध्यान केंद्र और विपासना केंद्र के प्रस्तावों पर बनी सहमति
पटना/मोतिहारी। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विश्व के सबसे ऊँचे और महत्वपूर्ण बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के समग्र विकास की दिशा में बिहार सरकार ने पहल तेज कर दी है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने मोतिहारी स्थित केसरिया स्तूप एवं आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण कर अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की।
बैठक में केसरिया स्तूप को ईको-टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने, आसपास की भूमि के बेहतर उपयोग, हरित क्षेत्र बढ़ाने तथा पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करने पर चर्चा हुई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारियों ने स्तूप के संरक्षित क्षेत्र में निर्माण संबंधी नियमों की जानकारी दी, जिसके अनुसार 100 मीटर तक निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा तथा 100 से 200 मीटर के दायरे में सीमित ऊंचाई वाले निर्माण ही किए जा सकेंगे।
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि विकास कार्य पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल हों। ऊंची इमारतों के बजाय ईको-फ्रेंडली हट्स, हरित क्षेत्र, आकर्षक लैंडस्केपिंग और पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में सरोत्तर झील को भी ईको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया। यहां बोटिंग, कैफेटेरिया, पार्क और अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की योजना पर सहमति बनी। इसके अलावा जेन पार्क, चिल्ड्रेन पार्क, ध्यान केंद्र और विपासना केंद्र के निर्माण के सुझावों को भी सकारात्मक रूप से स्वीकार किया गया।
अंत में विभागीय ईको-टूरिज्म निर्माण सलाहकार को सभी प्रस्तावों का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर शीघ्र विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया, ताकि आवश्यक स्वीकृति के बाद विकास कार्य जल्द शुरू किए जा सकें।

केसरिया स्तूप बनेगा बिहार का प्रमुख ईको-टूरिज्म हब, समग्र विकास की तैयारी तेज
