फुलवारी शरीफ, पटना। असम और ओडिशा में हालिया भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज बहाव के कारण कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि हजारों घर क्षतिग्रस्त होने के साथ फसलों और पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रहने और भोजन की समस्या उत्पन्न हो गई है तथा कई लोग राहत शिविरों और अस्थायी ठिकानों में रहने को मजबूर हैं।
इस मानवीय संकट को देखते हुए इमारत-ए-शरिया बिहार, ओडिशा एवं झारखंड, फुलवारी शरीफ ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेज कर दिया है। अमीर-ए-शरीअत हज़रत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी के निर्देश पर 19 सदस्यों की दो राहत टीमें असम और ओडिशा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं।
राहत टीमें प्रभावित परिवारों के बीच खाद्य सामग्री, आवश्यक राहत सामग्री और जरूरत के मुताबिक अन्य जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटी हैं। साथ ही, टीमों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों की जमीनी स्थिति का आकलन भी किया जा रहा है, ताकि आगे की राहत और पुनर्वास की जरूरतों को चिन्हित किया जा सके।
असम भेजी गई राहत टीम का नेतृत्व मौलाना अहमद हुसैन मदनी कासमी, सहायक नाज़िम इमारत-ए-शरिया, कर रहे हैं। वहीं ओडिशा राहत टीम की जिम्मेदारी मुफ्ती अब्दुल्ला अनस कासमी संभाल रहे हैं। दोनों टीमों में इमारत-ए-शरिया के उलेमा के साथ-साथ जामिया रहमानी, मुंगेर के शिक्षक भी शामिल हैं।
इमारत-ए-शरिया के नाज़िम मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सईदुर्रहमान कासमी ने कहा कि इमारत-ए-शरिया ने प्राकृतिक आपदाओं के समय हमेशा राहत और पुनर्वास कार्यों में अपनी भूमिका निभाई है। इस बार भी संस्था की टीमें प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाने के साथ-साथ क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों का आकलन कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत के साथ आगे चलकर पुनर्वास की भी आवश्यकता होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए इमारत-ए-शरिया राहत कार्यों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सईदुर्रहमान कासमी ने समाज के सक्षम और संवेदनशील लोगों से अपील की कि वे धर्म और जाति से ऊपर उठकर मानवता की सेवा के इस अभियान में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों की मदद करना इंसानियत की बड़ी जिम्मेदारी है।
इमारत-ए-शरिया ने अपने राहत कोष के माध्यम से आर्थिक सहयोग की भी अपील की है। संस्था की ओर से जिम्मेदारों, नकीबों, नायब नकीबों, उलेमा, इमामों तथा आम नागरिकों से विशेष रूप से आग्रह किया गया है कि वे अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग देकर बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद और पुनर्वास में भागीदार बनें।
संस्था के अनुसार, राहत कोष में प्राप्त आर्थिक सहयोग का उपयोग बाढ़ प्रभावित परिवारों तक खाद्य एवं आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने तथा जरूरत के अनुसार पुनर्वास कार्यों में किया जाएगा। इमारत-ए-शरिया का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाई जा सके और इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को मुश्किल की इस घड़ी में आवश्यक सहायता मिल सके।


