बाल कल्याण बजट 2026-27 को अधिक प्रभावी बनाने पर तकनीकी परामर्श आयोजित
पटना, 10 जुलाई। बिहार सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए शुक्रवार को पटना में ‘बिहार बाल कल्याण बजट 2026-27’ पर तकनीकी परामर्श का आयोजन किया। यह कार्यक्रम यूनिसेफ और चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएनएलयू) के बाल अधिकार केंद्र के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसमें राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, वित्त विशेषज्ञों और विकास सहयोगी संस्थाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वित्त विभाग की सचिव (व्यय) रचना पाटिल ने कहा कि वर्ष 2013-14 में बाल कल्याण बजट की शुरुआत के बाद बिहार ने बच्चों पर सार्वजनिक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि केवल बजट आवंटन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उसका लाभ बच्चों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
यूनिसेफ बिहार की प्रमुख डॉ. मोनिका नील्सन ने कहा कि बच्चों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने में बिहार ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और बाल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर योजना, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया।
तकनीकी सत्र में यूनिसेफ बिहार के सोशल पॉलिसी स्पेशलिस्ट डॉ. अभय कुमार ने ‘बाल कल्याण बजट विश्लेषण 2026-27’ प्रस्तुत करते हुए पिछले दस वर्षों के बजट आवंटन और व्यय की समीक्षा की। वहीं, यूनिसेफ इंडिया के विशेषज्ञ डॉ. सौमेन बागची ने बच्चों पर केंद्रित सार्वजनिक वित्त प्रबंधन की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी साझा की।
परामर्श के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने वर्तमान बजट प्रणाली की समीक्षा करते हुए बच्चों की आवश्यकताओं के अनुरूप बजट को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए कई सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने कहा कि बिहार की लगभग आधी आबादी बच्चों की है, इसलिए स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का समापन सीएनएलयू की डॉ. सुगंधा सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
