पेपरलेस रजिस्ट्री के विरोध में पटना निबंधन कार्यालय में अधिवक्ताओं व कातिबों का प्रदर्शन

पटना। बिहार सरकार द्वारा लागू की जा रही पेपरलेस निबंधन (रजिस्ट्री) व्यवस्था के विरोध में सोमवार को पटना निबंधन कार्यालय परिसर में अधिवक्ताओं और कातिबों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नई व्यवस्था को व्यावहारिक रूप से त्रुटिपूर्ण बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने अथवा आवश्यक सुधार के बाद ही लागू करने की मांग की।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता अनवर आलम और अनिल कुमार ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में लोग अभी भी डिजिटल प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। ऐसे में बिना पर्याप्त तैयारी और तकनीकी व्यवस्था के पेपरलेस रजिस्ट्री प्रणाली लागू करने से आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में कई तकनीकी और व्यावहारिक कमियां हैं, जिन्हें दूर किए बिना इसे लागू करना उचित नहीं होगा।

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि सरकार ने हाजीपुर से पेपरलेस निबंधन प्रणाली की शुरुआत की है और इसे संपतचक, फतुहा सहित अन्य निबंधन कार्यालयों में भी लागू किया जा रहा है। उनका आरोप है कि प्रणाली में मौजूद खामियों के कारण दस्तावेजों के निष्पादन और निबंधन प्रक्रिया में कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।खासकर बिहार की परिवेश की बात करते हुए कहा गया कि बिहार में अभी भी अधिसंख्यक ग्रामीण परिवेश में रहने वाले बुजुर्ग लोग शिक्षित नहीं है जिन्हें मोबाइल से संबंधित विशेष जानकारी नहीं रहने के कारण “ओटीपी “जैसे संवेदनशील क्रियाकलापों के द्वारा उन्हें ठगी का शिकार होना पड़ सकता है। इतना ही नहीं निबंधन कार्य से जुड़े वकील एवं कातिब लोगों के साथ भी नाइंसाफी की गई है।
अधिवक्ताओं और कातिबों ने सरकार से मांग की कि पेपरलेस निबंधन व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे न्यायालय की शरण लेने के साथ-साथ राज्यव्यापी आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कदम उठाने को बाध्य होंगे।

इस संबंध में निबंधन कार्यालय के रजिस्ट्रार से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कातिब और अन्य संबंधित लोग शामिल हुए तथा सरकार से पेपरलेस निबंधन व्यवस्था की कमियों को दूर कर आम जनता के हित में निर्णय लेने की मांग की।

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