विश्व कला दिवस पर मधुबनी में मिथिला के 9 पद्मश्री कलाकारों का सम्मान, ई-पोर्टल से बिकेंगी पेंटिंग

डीएम बोले- कलाकारों को मिलेगी बिक्री की 80% राशि सीधे खाते में, पद्मश्री सीता देवी को बताया ‘कला जगत का सूर्य’

मधुबनी, 15 अप्रैल, 2026: कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार द्वारा संचालित मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी के बहुउद्देशीय सभागार में मंगलवार को विश्व कला दिवस-सह-पद्मश्री सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में मिथिला चित्रकला के नौ पद्मश्री से सम्मानित कलाकारों एवं उनके परिजनों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी, मधुबनी श्री आनंद शर्मा, संस्थान के निदेशक श्री चंद्रशेखर प्रसाद सिंह, सभी पद्मश्री सम्मानित कलाकारों एवं उनके परिजन, डॉ. प्रो. नरेंद्र नारायण सिंह ‘निराला’, प्रदीप कांत चौधरी, श्री कौशिक कु. झा, वक्ता श्रीमती माला झा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। मंच संचालन प्रथम चरण में डॉ. रानी झा एवं द्वितीय चरण में कनीय आचार्य श्री प्रतीक प्रभाकर ने किया।

9 पद्मश्री कलाकारों को मिला सम्मान:

जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा ने उपस्थित पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री शिवन पासवान एवं पद्मश्री जगदंबा देवी, पद्मश्री सीता देवी, पद्मश्री गंगा देवी, पद्मश्री महासुंदरी देवी, पद्मश्री गोदावरी दत्त, पद्मश्री शांती देवी के परिजनों को मिथिला के पारंपरिक पाग-डोपटा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

डीएम ने की बड़ी घोषणा: 80% राशि सीधे कलाकार को

अपने अभिभाषण में डीएम आनंद शर्मा ने कहा, “यह हम सभी के लिए गौरव का दिन है कि हम आज मिथिला के नौ पद्मश्री अवार्डी कलाकारों को सम्मानित कर रहे हैं। मेरा सौभाग्य है कि मुझे उस जिले की सेवा करने का मौका मिला जहां इतने पद्मश्री विराजमान हैं।” उन्होंने घोषणा की कि मिथिला चित्रकला के कलाकारों की कृतियों की बिक्री हेतु ऑनलाइन ई-पोर्टल अंतिम चरण में है। मिथिला चित्रकला संस्थान इसकी प्रमाणिकता की गारंटी देगा। ई-पोर्टल से बिकने वाली प्रत्येक कलाकृति की 80% राशि सीधे कलाकार के खाते में जाएगी। शेष 20% राशि ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं संस्थान के विकास में उपयोग होगी।

निदेशक बोले- ‘हर दिन होगा उत्सव’

संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने कहा कि “कला केवल संदर्श का माध्यम नहीं बल्कि मानव सभ्यता की आत्मा है। लोक कला समाज की जड़ों से जुड़ी होती है।” उन्होंने बताया कि यह संस्थान मिथिला चित्रकला और बिहार की अन्य लोक कलाओं के समग्र विकास, अध्ययन, शोध, अभिलेखन एवं प्रचार-प्रसार के लिए स्थापित है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि “हमारे नेतृत्व में संस्थान का प्रत्येक दिन उत्सव के समान होगा।”

वक्ताओं ने साझा किए संस्मरण:

कार्यक्रम में प्रदीप कांत चौधरी ने बताया कि विश्व कला दिवस की शुरुआत 15 अप्रैल 2012 में हुई और 2019 में यूनेस्को ने इसे मान्यता दी। यह दिन इटली के प्रसिद्ध कलाकार लियोनार्दो द विंची के जन्मदिन पर मनाया जाता है।

वक्ता श्रीमती माला झा ने पद्मश्री सीता देवी को याद करते हुए कहा, “वह कला जगत की सूर्य थीं, जिन्होंने कला को विश्व भर में प्रकाशित किया। सीता देवी ने भित्ति चित्र को मिथिला चित्रकला के रूप में विश्व पटल पर पहुंचाया और अमेरिका, फ्रांस, जापान आदि देशों में इसका प्रदर्शन किया।”

डॉ. प्रो. नरेंद्र नारायण सिंह ‘निराला’ ने अपनी पुस्तक ‘मिथिला चित्रकला तत्व-विमर्श’ पर व्याख्यान दिया और छात्र-छात्राओं से रंग-रेखाओं के साथ किताबों की दुनिया पर भी शोध करने का आग्रह किया।

समारोह के सफल संचालन में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री नीतीश कुमार, लेखा पदाधिकारी श्री सुरेन्द्र प्रसाद यादव, पद्मश्री बौआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री शिवन पासवान, डॉ. रानी झा, श्री संजय कु. जायसवाल, श्री प्रतीक प्रभाकर सहित संस्थान के सभी कर्मियों ने अहम योगदान दिया।

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