सहायक अभियंता अमर सिंह चौहान की आत्महत्या के बाद प्रदेशभर के अभियंताओं में आक्रोश, 8 सूत्रीय मांगों के साथ सरकार को सौंपा ज्ञापन
रायपुर/बिलासपुर, 16 जुलाई।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सहायक अभियंता स्वर्गीय अमर सिंह चौहान द्वारा 15 जुलाई 2026 को आत्महत्या किए जाने के मामले ने प्रदेशभर के अभियंताओं को झकझोर दिया है। घटना के बाद इंजीनियर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ ने विभाग की सचिव को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि मीडिया में प्रकाशित जानकारी के अनुसार मृतक द्वारा छोड़े गए कथित सुसाइड नोट में विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा स्थानांतरण और अन्य प्रकार के दबाव बनाए जाने का उल्लेख किया गया है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।
अभियंताओं पर मानसिक दबाव का आरोप
ज्ञापन में कहा गया है कि विभाग के अभियंता लंबे समय से मानसिक एवं प्रशासनिक दबाव में कार्य कर रहे हैं। अभियंताओं के स्थानांतरण के लिए कोई स्पष्ट और पारदर्शी नीति नहीं होने से जनप्रतिनिधियों और अन्य व्यक्तियों का अनावश्यक हस्तक्षेप बढ़ जाता है। कई बार अपर्याप्त तथ्यों के आधार पर शिकायत मिलने पर भी स्थानांतरण कर दिए जाते हैं, जिससे अभियंताओं में असुरक्षा और तनाव का माहौल बनता है।
दंतेवाड़ा बाढ़ में किया था उल्लेखनीय कार्य
एसोसिएशन ने बताया कि अमर सिंह चौहान ने दंतेवाड़ा जिले में आई बाढ़ के दौरान निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य किया था। इसके बावजूद शिकायतों के आधार पर उनका स्थानांतरण बिलासपुर नगर निगम कर दिया गया। परिवार से लंबे समय तक दूर रहने और लगातार मानसिक दबाव के कारण वे तनावग्रस्त रहने लगे थे।
एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
इंजीनियर्स एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष आठ सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें निष्पक्ष जांच, संबंधित अधिकारियों को हटाना, स्पष्ट स्थानांतरण नीति बनाना, अभियंताओं पर अनैतिक दबाव रोकने की व्यवस्था, इंजीनियरिंग कैडर को पृथक करने सहित पूर्व में लंबित मांगों पर कार्रवाई शामिल है।
7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर ठोस निर्णय और कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेशभर के अभियंता लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन तथा अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए बाध्य होंगे। संगठन ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि पूरे अभियंता समुदाय के लिए गंभीर चेतावनी है। शासन और विभाग को समय रहते संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
