NSD सेंटर से बिहार की रंगमंचीय परंपरा को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान

पटना, 2 सितंबर। बिहार में कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर राज्य सरकार की ओर से तेजी से कार्य किया जा रहा है। कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में विभाग की उपलब्धियों, योजनाओं और भावी कार्ययोजना की जानकारी दी गई।
कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री डा. प्रमोद कुमार ने कहा कि बिहार में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के नए सेंटर की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी द्वारा केंद्र सरकार से बिहार में NSD सेंटर की स्थापना को मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है। इससे बिहार की गौरवशाली रंगमंचीय एवं सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही राज्य के कलाकारों और युवाओं को अभिनय, रंगमंच और स्टेजक्राफ्ट सहित विभिन्न विधाओं में उच्चस्तरीय प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे।
मंत्री ने बताया कि राज्य के सभी 38 जिलों में अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की पहल के तहत अब तक करीब 3,000 बच्चों को नृत्य, संगीत, वाद्य और अन्य कला विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी द्वारा रामचरितमानस पर आधारित 108 मीटर लंबी मिथिला पेंटिंग को वर्ल्ड रिकॉर्ड का दर्जा प्राप्त हुआ है।
240 उत्सव-महोत्सव का सांस्कृतिक कैलेंडर
वर्ष 2026-27 के सांस्कृतिक कैलेंडर में करीब 240 उत्सव एवं महोत्सव शामिल किए गए हैं। वरिष्ठ और आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना के तहत 3,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन का प्रावधान है। अब तक 411 कलाकारों का चयन किया जा चुका है।
वहीं 20 जुलाई 2026 को करीब 1,100 श्रद्धालुओं के लिए ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व–1000 वर्षों की अटूट आस्था’ के अवसर पर दो दिवसीय सोमनाथ यात्रा आयोजित की गई। 9 से 17 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक 10 हजार से अधिक युवाओं एवं जनप्रतिनिधियों की भागीदारी में तिरंगा रैली निकाली गई।
7 हजार से अधिक कलाकार पोर्टल पर पंजीकृत
विभागीय सचिव श्री प्रणव कुमार ने बताया कि समग्र कलाकार पंजीकरण पोर्टल पर अब तक 7,000 से अधिक कलाकार पंजीकृत हो चुके हैं। बिहार को फिल्म-फ्रेंडली डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए फिल्म पोर्टल पर 862 कलाकार, 148 निर्माता और 29 सेवा प्रदाता ऑनबोर्ड किए गए हैं।
बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति 2024 के तहत अब तक 59 से अधिक परियोजनाओं को शूटिंग की अनुमति दी गई है, जिसमें 46 फिल्में, 2 वेब सीरीज और 11 डॉक्यूमेंट्री शामिल हैं। फिल्म एवं नाट्य क्षेत्र के 47 मेधावी युवाओं को 30.46 लाख रुपये की छात्रवृत्ति दी गई है।
सात जिलों में अटल कला भवन का निर्माण पूरा
राज्य के सभी जिलों में 620 दर्शक क्षमता वाले अटल कला भवन के निर्माण की योजना पर काम चल रहा है। सारण, गया, पूर्णिया, सहरसा, बेगूसराय, मुंगेर और दरभंगा समेत 7 जिलों में भवन निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि अन्य जिलों में कार्य प्रगति पर है।
विभिन्न कला संस्थाओं द्वारा आयोजित कार्यशालाओं के माध्यम से अब तक एक हजार से अधिक बच्चों को प्रशिक्षण दिया गया है। विलुप्तप्राय कलाओं के संरक्षण के लिए शुरू गुरु-शिष्य योजना में 260 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
8 लाख से अधिक पांडुलिपियां चिन्हित
ज्ञान भारतम् मिशन के तहत बिहार के सभी 38 जिलों में पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया है। अब तक 8 लाख से अधिक पांडुलिपियां चिन्हित की गई हैं। इनके डिजिटलीकरण एवं मेटाडेटा निर्माण के लिए 6.24 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
संग्रहालय और पुरातत्व संरक्षण पर भी जोर
भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय-सह-वाचनालय के लिए मंत्रिपरिषद से स्वीकृति मिलने के बाद वाचनालय का निर्माण पूरा किया गया और 11 अगस्त 2026 को इसका उद्घाटन हुआ। वहीं लखीसराय की ऐतिहासिक लाल पहाड़ी के संरक्षण एवं पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए 29 करोड़ 28 लाख 75 हजार रुपये की परियोजना पर कार्य जारी है।
वैशाली स्थित बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप का निर्माण 550.48 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हो चुका है। इसके प्रमुख भवन 5 अक्टूबर 2025 से पर्यटकों के लिए खुले हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और बिहार सरकार के बीच राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों एवं पुरातात्विक स्थलों के जीर्णोद्धार, उन्नयन और रखरखाव के लिए समझौता भी किया गया है। विभाग की ओर से कला, संस्कृति, संग्रहालय और पुरातत्व के क्षेत्र में मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में भी नियुक्ति प्रक्रिया जारी है।
कला एवं संस्कृति विभाग की इन पहलों से बिहार की कला, लोक परंपरा, रंगमंच, फिल्म, संग्रहालय और ऐतिहासिक विरासत को नई गति मिलने की उम्मीद है। NSD सेंटर की स्थापना से राज्य के कलाकारों और युवाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण और अवसरों का नया द्वार खुलने की संभावना है।

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