शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पटना में कॉन्क्लेव आयोजित
पटना, 28 अक्टूबर। बाल देखभाल संस्थानों से बाहर निकलने वाले युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके बेहतर भविष्य के लिए बिहार सरकार, यूनिसेफ, बिहार केयर लीवर्स नेटवर्क (बीसीएलएन) और उदयन केयर ने संयुक्त पहल की है। इस उद्देश्य से पटना में आयोजित कॉन्क्लेव में युवाओं की शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, आवास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में सरकारी अधिकारियों, केयर लीवर्स, विकास से जुड़े संगठनों, कौशल विकास संस्थानों और नियोक्ताओं ने भाग लिया।
कॉन्क्लेव का उद्देश्य बाल देखभाल संस्थानों से निकलने के बाद युवाओं को आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान तलाशना और उनके लिए संस्थागत देखभाल के बाद उपलब्ध सहायता सेवाओं को मजबूत करना था। इस दौरान युवाओं को उच्च शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, रोजगार, जरूरी दस्तावेज और भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
युवाओं को अपने सपने पूरे करने के लिए किया प्रेरित
बिहार सरकार की समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने युवाओं को अपनी महत्वाकांक्षाएं बनाए रखने, शिक्षा जारी रखने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने डॉक्टर बनने के सफर और संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियां किसी के सपनों की सीमा तय नहीं कर सकतीं। युवाओं को खुद पर विश्वास रखना चाहिए और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाते हुए अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ता से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य के निर्माण में भावनात्मक सहयोग तथा सकारात्मक सोच वाले मित्रों के महत्व को भी रेखांकित किया।
18 वर्ष की उम्र से पहले शुरू हो तैयारी
समाज कल्याण निदेशालय, बिहार की निदेशक सुश्री इनायत खान ने कहा कि सरकारी संरक्षण में पले-बढ़े बच्चों को वयस्क जीवन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया 18 वर्ष की उम्र से पहले ही शुरू हो जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थान से बाहर निकलने के बाद युवाओं को आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए सुरक्षा, शिक्षा और आवश्यक सहायता मिलना जरूरी है। युवाओं को केवल संस्थागत सहयोग तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ना चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन से जुड़े फैसले ले सकें।
नीतियों की जानकारी और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी जरूरी
उदयन केयर की संस्थापक एवं मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. किरण मोदी ने कहा कि बाल देखभाल संस्थानों से निकलने वाले युवाओं को उनके कल्याण के लिए बनाई गई नीतियों और सरकारी प्रावधानों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं को अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में अपनी बात रखने और निर्णय प्रक्रिया में सार्थक भागीदारी का अवसर देने पर जोर दिया। यूनिसेफ बिहार के बाल संरक्षण विशेषज्ञ बंकू बिहारी सरकार ने भी कार्यक्रम में मुख्य वक्तव्य दिया।
शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच बढ़ाने पर चर्चा
कॉन्क्लेव में बिहार केयर लीवर्स नेटवर्क के सदस्यों ने अपने अनुभव, उपलब्धियां, चुनौतियां और भविष्य की आकांक्षाएं साझा कीं। इस दौरान युवाओं को उनके अधिकारों के हकदार के रूप में पहचान देने तथा उनके जीवन को प्रभावित करने वाले फैसलों में उनकी राय शामिल करने की आवश्यकता बताई गई।
कार्यक्रम में केयर लीवर्स ने ‘प्यार, देखभाल और सहयोग का घोषणापत्र’ प्रस्तुत किया। उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले युवाओं को सम्मानित किया गया। साथ ही, एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया, जिसमें संस्थागत देखभाल से बाहर निकलने वाले युवाओं के संघर्षों, अनुभवों और उपलब्धियों को शामिल किया गया है।
कौशल विकास संस्थानों और नियोक्ताओं के साथ हुई चर्चा में युवाओं को शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के उपायों पर विचार किया गया। इसके लिए बिहार कौशल विकास मिशन, शिक्षा विभाग के करियर पोर्टल एवं करियर कार्ड, बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (बीबीओएसई), राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस), उद्योग विभाग, जीविका, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग तथा होटल उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ समन्वय की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव
दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम और राजस्थान से आए केयर लीवर्स नेटवर्क के प्रतिनिधियों ने आपसी सहयोग बढ़ाने, नेटवर्क को मजबूत करने और युवाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाने से जुड़े अनुभव साझा किए। दूसरे राज्यों में किए जा रहे प्रयासों से सीख लेकर बिहार केयर लीवर्स नेटवर्क को और सशक्त बनाने पर भी चर्चा हुई।
कॉन्क्लेव में हुई चर्चा के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य बाल देखभाल संस्थानों से बाहर निकलने वाले युवाओं को समय पर उनकी जरूरतों के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे शिक्षा और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन सकें तथा समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकें।


