बिहार में मातृ एनीमिया पर बड़ा फोकस: समय पर जांच और सही इलाज से मां-बच्चे को सुरक्षित रखने पर जोर

oplus_2
oplus_2
****************
पटना, 29 अगस्त 2026। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया यानी खून की कमी मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। इसी को लेकर पटना में ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज संस्था की ओर से तकनीकी विशेषज्ञों के साथ राज्य स्तरीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समय पर जांच, सही उपचार और नियमित फॉलो-अप को बेहद जरूरी बताया। साथ ही मातृ एनीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मीडिया और समुदाय की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
राधा देवी जागेश्वरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, मुजफ्फरपुर की प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. आभा रानी सिन्हा ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 से सर्वेक्षण-5 के बीच बिहार में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की व्यापकता 58.3 प्रतिशत से बढ़कर 63.1 प्रतिशत हुई है।
उन्होंने कहा कि मातृ एनीमिया से निपटने के लिए केंद्र और बिहार सरकार की ओर से कई कदम उठाए जा रहे हैं। एनीमिया मुक्त भारत अभियान 2.0 के तहत रोकथाम के साथ-साथ एनीमिया की पहचान और जरूरत के अनुसार उपचार पर जोर दिया जा रहा है।
डॉ. सिन्हा के मुताबिक, गंभीर एनीमिया की स्थिति में चिन्हित स्वास्थ्य केंद्रों पर इंट्रावेनस फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ के जरिए उपचार की मुफ्त सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। बिहार में मार्च 2026 से इस उपचार को पूरे राज्य में लागू किया गया है और लगभग 2 लाख खुराकें उपलब्ध कराई गई हैं।
वहीं, मेदांता पटना की निदेशक एवं प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मीना सामंत ने कहा कि केवल एनीमिया की पहचान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इलाज शुरू होने के बाद महिला की स्थिति पर लगातार नजर रखना और जरूरत के अनुसार उपचार में बदलाव करना भी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि इंट्रावेनस आयरन के जरिए जरूरत के अनुसार आयरन की मात्रा कम समय में पूरी करने में मदद मिल सकती है और कई मामलों में बार-बार अस्पताल आने की जरूरत भी कम हो सकती है। उन्होंने गर्भावस्था के दौरान इसके प्रभाव और सुरक्षा से जुड़े शोधों का भी उल्लेख किया।
ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के सीनियर डायरेक्टर अनुज घोष ने मीडिया से अपील की कि समाचारपत्र, टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मातृ एनीमिया को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं और उनके परिवारों तक यह संदेश पहुंचना जरूरी है कि समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार और नियमित फॉलो-अप को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने एनीमिया को लेकर समाज में मौजूद मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने तथा गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *